
नई दिल्ली, 17 जुलाई 2025:
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने केंद्र सरकार से विशेष सहायता के अंतर्गत राज्य के लिए 10,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त धनराशि की मांग की है। उन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात कर वित्त वर्ष 2025-26 के लिए यह अनुरोध किया, जिससे राज्य में चल रही पूंजीगत परियोजनाओं को गति मिल सके।
मुख्यमंत्री नायडू ने दिल्ली में अपनी दो दिवसीय यात्रा के दौरान यह मुद्दा उठाया और वित्त मंत्री को एक ज्ञापन सौंपते हुए राज्य की विभिन्न विकास परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता मांगी। उन्होंने 16वें वित्त आयोग से भी आग्रह किया कि bifurcation (विभाजन) के बाद उत्पन्न हुई राजस्व घाटे की स्थिति को देखते हुए आंध्र प्रदेश सरकार की अपील को स्वीकृति दी जाए।
अमरावती के निर्माण हेतु विशेष सहायता की मांग
चंद्रबाबू नायडू ने अमरावती की राजधानी के निर्माण को लेकर गहन जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना की कुल लागत ₹79,280 करोड़ है, जिसमें से ₹44,351 करोड़ की परियोजनाएं पहले ही आरंभ हो चुकी हैं। लेकिन ₹26,000 करोड़ की धनराशि अब भी अप्राप्त है। उन्होंने मांग की कि इस राशि को दूसरी किस्त के रूप में अनुदान स्वरूप जारी किया जाए, जिससे अमरावती की विकास प्रक्रिया पूरी हो सके।
केन्द्र के प्रति आभार प्रकट
मुख्यमंत्री ने अमरावती और पोलावरम परियोजनाओं में अब तक केंद्र सरकार द्वारा दिए गए सहयोग के लिए धन्यवाद भी व्यक्त किया।
तेलंगाना-आंध्र के बीच जल प्रबंधन पर बैठक
इसी दौरान, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री नायडू और तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल के साथ बैठक की। इस बैठक में दोनों राज्यों के बीच जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन पर चर्चा हुई।
तेलंगाना सरकार ने सभी जल परियोजनाओं में टेलीमेट्री प्रणाली लागू करने का सुझाव दिया, जिससे जल उपयोग की वास्तविक मात्रा को मापा जा सके। आंध्र प्रदेश ने इस सुझाव को स्वीकार कर लिया। इसके अलावा, दोनों पक्षों ने गोदावरी और कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड के स्थानों को लेकर सहमति जताई – गोदावरी बोर्ड हैदराबाद में और कृष्णा बोर्ड आंध्र प्रदेश में रहेगा।
साझा तकनीकी समिति का गठन
जल विवादों के स्थायी समाधान के लिए दोनों राज्यों ने एक ‘अधिकारियों एवं तकनीकी विशेषज्ञों की समिति’ गठित करने पर सहमति जताई, जो सभी लंबित मुद्दों पर चर्चा करेगी, जैसे – कृष्णा जल बंटवारा, लंबी अवधि की योजनाएं और जल संरचनाओं का रखरखाव।
निष्कर्ष:
मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की यह पहल आंध्र प्रदेश के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। विशेष वित्तीय सहायता की मांग और केंद्र के साथ तालमेल, साथ ही तेलंगाना के साथ सहयोगात्मक जल प्रबंधन प्रयास, भविष्य में राज्य की आर्थिक और सामाजिक स्थिरता में अहम भूमिका निभा सकते हैं।