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देखभाल अर्थव्यवस्था में निवेश: वैश्विक समृद्धि और लैंगिक समानता की ओर एक सशक्त कदम


परिचय
आज जब दुनिया सामाजिक और आर्थिक असंतुलनों से जूझ रही है, तब एक ऐसी आवश्यकता सामने आई है जिसे लंबे समय तक अनदेखा किया गया—”देखभाल अर्थव्यवस्था” में निवेश। अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने हाल ही में एक “केयर इकोनॉमी ब्रीफ” जारी कर सरकारों से अपील की है कि वे देखभाल सेवाओं को अपने विकास और वित्तीय नीति का अभिन्न हिस्सा बनाएं। यह न केवल सामाजिक जिम्मेदारी है, बल्कि आर्थिक समृद्धि और लैंगिक समानता के लिए एक रणनीतिक अवसर भी है।


2030 तक देखभाल की बढ़ती आवश्यकता
ILO की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2030 तक दुनिया भर में लगभग 2.3 अरब लोगों को देखभाल सेवाओं की आवश्यकता होगी—जो कि 2015 के मुकाबले 20 करोड़ की वृद्धि है। इस बढ़ती मांग के पीछे कई कारण हैं—बुज़ुर्ग जनसंख्या में वृद्धि, पारिवारिक संरचनाओं में बदलाव, और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच में सुधार।

इस चुनौती को केवल सामाजिक कल्याण के दृष्टिकोण से नहीं देखा जा सकता। यह आर्थिक निवेश का एक ऐसा क्षेत्र है जो व्यापक और दीर्घकालिक लाभ ला सकता है।


लैंगिक असमानता और देखभाल कार्य
आज भी दुनिया भर में गैर-वेतनभोगी देखभाल कार्यों का बड़ा हिस्सा महिलाओं द्वारा किया जाता है। चाहे वह बच्चों की परवरिश हो, बुज़ुर्गों की सेवा, या विकलांगों की सहायता—यह सब महिलाओं पर निर्भर रहता है। इसका नतीजा यह होता है कि महिलाएं औपचारिक रोजगार, शिक्षा और आर्थिक अवसरों से पीछे रह जाती हैं।

अगर सरकारें बाल देखभाल, वृद्धजन सहायता, और दिव्यांगजन सेवाओं में सार्वजनिक निवेश करें, तो यह महिलाओं के समय को मुक्त कर सकता है और उन्हें शिक्षा व रोजगार के अवसरों की ओर अग्रसर कर सकता है। इससे महिला श्रम भागीदारी बढ़ेगी और समावेशी विकास को गति मिलेगी।


समुदाय और अर्थव्यवस्था को मजबूती
देखभाल सेवाओं में निवेश केवल महिलाओं के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे समुदाय के लिए लाभकारी है। अच्छी गुणवत्ता वाली देखभाल सेवाएं सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार, कमजोर वर्गों की सुरक्षा, और परिवारों पर दबाव कम करने का काम करती हैं।

इसके साथ ही, देखभाल क्षेत्र स्वयं एक बड़े और स्थिर रोजगार का स्रोत है। यह स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को संबल देता है और ऐसे कार्य अवसर प्रदान करता है जो न केवल आवश्यक हैं बल्कि मानवीय गरिमा से भी जुड़े होते हैं।


देखभाल: एक सार्वजनिक संपत्ति, एक रणनीतिक जरूरत
ILO के अनुसार, देखभाल को अब “सार्वजनिक भलाई” (Public Good) के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए। यह केवल भावनात्मक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि रणनीतिक विकास का अनिवार्य स्तंभ है। जैसे-जैसे वैश्विक परिस्थितियां बदल रही हैं, वैसे-वैसे यह और स्पष्ट होता जा रहा है कि देखभाल को राष्ट्रीय नीतियों के केंद्र में लाना समय की मांग है।


निष्कर्ष
देखभाल अर्थव्यवस्था में निवेश केवल एक खर्च नहीं, बल्कि एक लाभकारी निवेश है—जिसका प्रतिफल मिलेगा मजबूत समाज, समान अवसर, और समृद्ध राष्ट्र के रूप में। जब हम देखभाल को प्राथमिकता देंगे, तब हम महिलाओं को सशक्त बनाएंगे, परिवारों को सहारा देंगे, और दुनिया को अधिक न्यायपूर्ण और टिकाऊ बनाएंगे।

अब समय आ गया है कि हम देखभाल को सिर्फ निजी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि राष्ट्र की सामूहिक प्रतिबद्धता के रूप में स्वीकारें।



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