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🇮🇳 ‘निस्तार’: आत्मनिर्भर भारत की गहराइयों में डूबती सफलता की नई मिसाल


प्रस्तावना
भारत ने 18 जुलाई 2025 को एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की, जब देश का पहला पूर्णतः स्वदेशी डाइविंग सपोर्ट वेसल ‘निस्तार’ भारतीय नौसेना में आधिकारिक रूप से शामिल किया गया। यह आयोजन आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में नौसेना डॉकेयार्ड पर सम्पन्न हुआ, जिसमें केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री श्री संजय सेठ भी उपस्थित रहे।

क्या है ‘निस्तार’?
‘निस्तार’ एक विशेष प्रकार का युद्धपोत है जिसे समुद्र की गहराइयों में डाइविंग और रेस्क्यू (बचाव) अभियानों के लिए तैयार किया गया है। इसका नाम संस्कृत से लिया गया है, जिसका अर्थ होता है – मुक्ति, उद्धार या बचाव। यह पोत भारत की समुद्री क्षमता को न सिर्फ और मजबूत बनाता है, बल्कि आत्मनिर्भरता की दिशा में भी एक निर्णायक कदम है।

स्वदेशी निर्माण की शक्ति
इस पोत का निर्माण हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा किया गया है और यह भारत में बनाए गए ऐसे जहाजों में से पहला है जिसे पूरी तरह से स्वदेशी तकनीकों और संसाधनों से तैयार किया गया है। भारतीय रजिस्टर ऑफ शिपिंग (IRS) के मानकों के अनुरूप तैयार किया गया यह पोत भारत सरकार के ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियानों का उत्कृष्ट उदाहरण है।

उद्योगों का योगदान
इस परियोजना में 120 से अधिक MSMEs (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम) ने अपनी महत्वपूर्ण भागीदारी निभाई है, जिससे न सिर्फ तकनीकी नवाचार को बढ़ावा मिला, बल्कि 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग सुनिश्चित किया गया।

तकनीकी विशेषताएं और क्षमताएं

लंबाई: 118 मीटर

वज़न: लगभग 10,000 टन

कार्य: डीप सी डाइविंग, अंडरवाटर रेस्क्यू मिशन, नौसेना अभियानों में सहायता

उन्नत संचार और नेविगेशन तकनीक से सुसज्जित

अत्याधुनिक उपकरणों और जीवन रक्षक प्रणालियों से लैस

‘निस्तार’ अब उन चुनिंदा नौसेनाओं की सूची में भारतीय नौसेना को भी सम्मिलित करता है जिनके पास ऐसी गहराई तक संचालन की क्षमता है।

राष्ट्रीय सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम
यह जहाज न केवल तकनीकी रूप से भारत की शक्ति को दर्शाता है, बल्कि यह रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ठोस पहल भी है। भारत सरकार की राष्ट्रनिर्माण और स्वदेशीकरण की नीति के अनुरूप, यह पोत भविष्य की सामरिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए डिज़ाइन किया गया है।

निष्कर्ष
‘निस्तार’ केवल एक पोत नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की समुद्री सीमा में तिरंगा लहराता हुआ एक गौरव है। यह दर्शाता है कि भारत अब रक्षा उत्पादन में केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि निर्माता भी बन चुका है। आने वाले वर्षों में यह डाइविंग सपोर्ट वेसल भारतीय नौसेना के अभियानों में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और वैश्विक मंच पर भारत की रणनीतिक उपस्थिति को और अधिक सशक्त करेगा।


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