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🌏 एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सतत विकास के लिए ADB की चक्रीय अर्थव्यवस्था पर जोर


➤ पारंपरिक सोच से परे: अब वक्त है बदलाव का

एशियाई विकास बैंक (ADB) ने एशिया और प्रशांत क्षेत्र के देशों को एक नई आर्थिक दिशा अपनाने का आह्वान किया है। ADB का कहना है कि अब समय आ गया है जब उत्पादन और उपभोग के पारंपरिक तरीकों को बदलकर चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) की ओर बढ़ा जाए — एक ऐसी प्रणाली जिसमें संसाधनों का अधिकतम उपयोग हो और अपशिष्ट की मात्रा न्यूनतम हो।

➤ चक्रीय अर्थव्यवस्था: क्या है यह मॉडल?

परंपरागत रूप से हमारी अर्थव्यवस्था “लो, बनाओ और फेंको” (Take, Make, Dispose) सिद्धांत पर आधारित रही है। लेकिन इस मॉडल ने पर्यावरण पर भारी दबाव डाला है — चाहे वह प्रदूषण हो, जलवायु परिवर्तन हो या कचरे का बढ़ता पहाड़।

इसके विपरीत, चक्रीय अर्थव्यवस्था एक ऐसी प्रणाली है, जिसमें संसाधनों को पुनः प्रयोग, मरम्मत, पुनर्चक्रण और पुनर्निर्माण के माध्यम से लंबे समय तक उपयोग में लाया जाता है। यह न केवल पर्यावरण के लिए लाभकारी है, बल्कि आर्थिक दृष्टिकोण से भी अधिक लचीली और व्यवहार्य है।

➤ क्यों जरूरी है यह बदलाव?

ADB द्वारा जारी एक चित्रमय प्रस्तुति में स्पष्ट किया गया है कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में तेजी से बढ़ती जनसंख्या और शहरीकरण के कारण प्राकृतिक संसाधनों पर अभूतपूर्व दबाव है। यदि मौजूदा उपभोग की प्रवृत्ति बनी रही, तो न तो पर्यावरण बचेगा और न ही अर्थव्यवस्था टिकाऊ रह पाएगी।

चक्रीय अर्थव्यवस्था की दिशा में कदम बढ़ाना इसलिए जरूरी है ताकि:

➤ रणनीतिक लाभ: पर्यावरण और अर्थव्यवस्था दोनों को लाभ

ADB यह स्पष्ट करता है कि यह बदलाव सिर्फ पर्यावरण संरक्षण के लिए नहीं है, बल्कि इससे स्थायी आर्थिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। उदाहरण के लिए:

➤ निष्कर्ष: एक विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता

ADB का संदेश सीधा और स्पष्ट है — चक्रीय अर्थव्यवस्था को अपनाना अब कोई वैकल्पिक रास्ता नहीं, बल्कि एशिया-प्रशांत की दीर्घकालिक समृद्धि और पारिस्थितिक संतुलन के लिए अनिवार्य कदम है। यह केवल नीति निर्माताओं की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि उद्योगों, नागरिकों और समुदायों — सभी की साझा भागीदारी से ही यह परिवर्तन संभव है।


अब समय आ गया है कि हम “उपयोग करो और फेंको” की सोच को पीछे छोड़ें और “फिर से उपयोग करो और बचाओ” की ओर बढ़ें — ताकि आने वाली पीढ़ियों को एक बेहतर, हरा-भरा और टिकाऊ भविष्य मिल सके। 🌱


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