
शिमला, 19 जुलाई 2025 – हिमाचल प्रदेश इस बार मानसून के भीषण प्रकोप से बुरी तरह प्रभावित हुआ है। राज्य में 20 जून से 18 जुलाई के बीच भयंकर वर्षा, भूस्खलन, बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के चलते कुल 116 लोगों की जान चली गई है, जिससे राज्य में चिंता और शोक का माहौल है।
🔺 आपदा से जुड़ी 68 मौतें, सड़क हादसों में गईं 48 जानें
राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) की रिपोर्ट के अनुसार, वर्षा से जुड़ी घटनाओं – जैसे कि बादल फटना, भूस्खलन, करंट लगना और डूबना – के कारण 68 लोग मारे गए, जबकि 48 लोगों की मृत्यु विभिन्न सड़क दुर्घटनाओं में हुई, जो मानसून की वजह से सड़कों पर मलबा, फिसलन और दृश्यता की कमी से उत्पन्न हुईं।
🏔️ भूस्खलन, बादल फटना और बाढ़ की दर्जनों घटनाएं
प्रदेश में अब तक 33 बाढ़, 22 बादल फटने और 19 भूस्खलन की घटनाएं सामने आई हैं। मंडी, कुल्लू, कांगड़ा और लाहौल-स्पीति ज़िले सर्वाधिक प्रभावित हुए हैं, जहां आवागमन ठप होने के साथ ही गांवों का संपर्क भी टूट गया है।
📊 जिलावार जानमाल का लेखा-जोखा
- मंडी और कांगड़ा में सबसे अधिक 16-16 मौतें हुई हैं।
- कुल्लू जिले में 7 लोग आपदा की भेंट चढ़े हैं।
- सड़क दुर्घटनाओं में सोलन (8), कुल्लू (7), चंबा (6), और शिमला (4) सबसे आगे रहे।
इन मौतों का सीधा संबंध खराब सड़क स्थितियों, लगातार बारिश, तीव्र ढलानों और अस्थिर चट्टानों से जोड़ा गया है।
⚡ विभिन्न कारणों से हुई मौतें
विस्तृत विवरण में यह सामने आया कि:
- बादल फटने से 14 लोग मारे गए,
- पानी में डूबने से 12 की जान गई,
- करंट लगने की घटनाओं में 5 लोगों की मौत हुई,
- भूस्खलन में 1 व्यक्ति की जान गई,
- अन्य हादसों जैसे चट्टान गिरने और सांप के काटने से 22 अन्य लोगों की मृत्यु हुई।
🏚️ आर्थिक नुकसान: बुनियादी ढांचे से लेकर फसल तक सब प्रभावित
वर्षा और आपदाओं के कारण न सिर्फ जनहानि हुई है, बल्कि सड़कों, पुलों, बिजली लाइनों, मकानों, खेतों और पशुधन को भी गहरा नुकसान पहुंचा है। अनुमान है कि राज्य को अब तक ₹123 करोड़ (₹1,23,000 लाख) का आर्थिक झटका लगा है।
📢 निष्कर्ष:
हिमाचल प्रदेश के लिए यह मानसून केवल मौसम नहीं, बल्कि एक गंभीर आपदा का चेहरा बन गया है। लगातार हो रही बारिश और उससे उपजे हालात सरकार और प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन चुके हैं। ज़रूरत है कि राज्य और केंद्र सरकार मिलकर राहत कार्य तेज़ करें, ताकि आने वाले दिनों में और अधिक जान-माल की हानि से बचा जा सके।