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शीला दीक्षित को श्रद्धांजलि: मल्लिकार्जुन खड़गे ने दी सम्मानपूर्वक याद, कहा – “दिल्ली की कायापलट करने वाली नेता थीं”


नई दिल्ली, 20 जुलाई 2025 – कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने आज दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए उनकी उपलब्धियों और दूरदर्शी नेतृत्व को भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

खड़गे ने सोशल मीडिया मंच ‘X’ पर लिखा, “हम शीला दीक्षित जी को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। उन्होंने दिल्ली को केवल एक राजधानी नहीं, बल्कि एक आधुनिक, सुव्यवस्थित और नागरिकों के लिए बेहतर जीवन की मिसाल बनाने में अहम योगदान दिया।”

उन्होंने शीला दीक्षित के कार्यकाल को “दृष्टि, समर्पण और विकास” का प्रतीक बताते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में दिल्ली ने बुनियादी ढांचे, परिवहन और शहरी सुविधाओं में ऐतिहासिक परिवर्तन देखा। उनके कार्यकाल के दौरान दिल्ली मेट्रो का विस्तार, सड़कों का चौड़ीकरण, फ्लाईओवर निर्माण, और पर्यावरण सुधार के कई प्रयास हुए, जिनका असर आज भी देखा जा सकता है।

शीला दीक्षित का निधन 20 जुलाई 2019 को हुआ था। वे तीन बार दिल्ली की मुख्यमंत्री रहीं और उन्होंने 15 वर्षों तक इस पद को गरिमा और कार्यकुशलता से निभाया। उनका राजनीतिक जीवन न केवल दिल्ली के विकास में, बल्कि महिला नेतृत्व के सशक्त उदाहरण के रूप में भी याद किया जाता है।

संविधान को लेकर भी दिया बड़ा बयान

इसी दिन खड़गे ने कर्नाटक में एक सभा को संबोधित करते हुए केंद्र सरकार और आरएसएस पर तीखा हमला किया। उन्होंने आरोप लगाया कि आज की सत्ता संविधान के मूल ढांचे को कमजोर करने का प्रयास कर रही है।

खड़गे ने कहा, “भारत का संविधान बाबा साहेब अंबेडकर की देन है। चाहे जितना भी प्रयास किया जाए, इसे खत्म नहीं किया जा सकता। जो लोग सार्वजनिक संस्थानों को निजी हाथों में सौंप रहे हैं, वही अब संविधान के साथ खिलवाड़ करना चाहते हैं।”

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार आम जनता की मेहनत और अधिकारों की अनदेखी कर, केवल कुछ पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने में लगी है। लेकिन कांग्रेस संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए हर मोर्चे पर संघर्ष करती रहेगी।


निष्कर्ष:
शीला दीक्षित का योगदान न केवल दिल्ली बल्कि पूरे भारत के लिए एक प्रेरणास्त्रोत है। मल्लिकार्जुन खड़गे की श्रद्धांजलि न केवल एक नेता को सम्मान देने का कार्य है, बल्कि यह एक लोकतांत्रिक चेतावनी भी है—कि विकास, समावेशिता और संविधान को बचाए रखना आज भी उतना ही आवश्यक है जितना अतीत में था।


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