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डोनाल्ड ट्रंप ने की “रेडस्किन्स” और “इंडियंस” टीम नामों की वापसी की मांग, कहा – यह विरासत और जनसमर्थन का विषय है

वॉशिंगटन, जुलाई 2025: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर सुर्खियों में आते हुए एक विवादास्पद बयान दिया है। उन्होंने पारंपरिक खेल टीमों जैसे “वॉशिंगटन रेडस्किन्स” और “क्लीवलैंड इंडियंस” के पुराने नामों को बहाल करने की मांग की है। ट्रंप ने इसे अमेरिकी मूल निवासियों की “संस्कृति और विरासत” से जोड़ते हुए कहा कि यह “राजनीतिक शुद्धता की अतिशयता” के खिलाफ एक ज़रूरी कदम है।

❝लोग नामों से नहीं, नीयत से आहत होते हैं❞ – ट्रंप

डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक अभियान रैली में कहा, “रेडस्किन्स और इंडियंस जैसे नाम हमारे देश की समृद्ध विरासत और खेल परंपरा का प्रतीक हैं। इन नामों को बदला जाना राजनीतिक दबाव के कारण हुआ, जबकि अधिकांश अमेरिकी इन नामों के प्रति सहानुभूति और सम्मान का भाव रखते हैं।”

उन्होंने यह भी दावा किया कि कई सर्वेक्षण यह दर्शाते हैं कि जनता इन पारंपरिक नामों को वापस चाहती है। “नाम बदलने से सम्मान नहीं बढ़ता, बल्कि इतिहास को मिटाने की कोशिश होती है,” उन्होंने कहा।

🏈 नाम बदलाव: विवाद और बदलाव की पृष्ठभूमि

वॉशिंगटन रेडस्किन्स ने 2020 में अपना नाम बदलकर “वॉशिंगटन कमांडर्स” कर लिया था, जबकि क्लीवलैंड इंडियंस को अब “क्लीवलैंड गार्डियंस” कहा जाता है। इन नामों को बदले जाने के पीछे मुख्य तर्क यह था कि ये अमेरिकी मूल निवासियों के लिए अपमानजनक और नस्लीय रूप से संवेदनशील माने जाते हैं।

हालांकि, ट्रंप का दावा है कि अधिकांश “नेटिव अमेरिकन समुदाय” इन नामों से अपमानित नहीं, बल्कि गर्व महसूस करते हैं।

🔍 विशेषज्ञों की राय बंटी हुई

जहाँ कुछ सांस्कृतिक विशेषज्ञ ट्रंप के तर्क को “अवांछित राजनीतिक हस्तक्षेप” मानते हैं, वहीं कुछ खेल प्रशंसक इस अभियान को खेल की पुरानी पहचान को बहाल करने की दिशा में एक प्रयास मानते हैं।

“यह केवल एक नाम नहीं, एक युग की पहचान है। लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि भाषा का प्रभाव गहरा होता है,” – यह कहना है संस्कृति मामलों के प्रोफेसर माइकल रेडफील्ड का।

📣 आगे क्या?

डोनाल्ड ट्रंप 2024 के राष्ट्रपति चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी की ओर से प्रमुख चेहरा रहे थे, और अब 2028 के चुनाव को लेकर भी उनकी सक्रियता लगातार बढ़ रही है। ऐसे में यह बयान सिर्फ एक सांस्कृतिक मुद्दा नहीं, बल्कि एक राजनीतिक रणनीति भी मानी जा रही है, जिससे वे “रूढ़िवादी मतदाताओं” का समर्थन फिर से मजबूत करना चाहते हैं।


निष्कर्ष:
डोनाल्ड ट्रंप का यह बयान एक बार फिर अमेरिका में सांस्कृतिक पहचान, नस्लीय संवेदनशीलता और खेल परंपराओं को लेकर बहस छेड़ चुका है। जहां कुछ लोग इसे गर्व और विरासत का विषय मानते हैं, वहीं दूसरों के लिए यह असंवेदनशीलता और पिछड़ेपन का प्रतीक है। फिलहाल, यह स्पष्ट है कि “रेडस्किन्स” और “इंडियंस” जैसे नामों की वापसी केवल खेल का मुद्दा नहीं, बल्कि राजनीति और पहचान का एक जटिल संगम बन चुका है।


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