नई दिल्ली, 22 जुलाई 2025 — देश के राजनीतिक गलियारों में उस वक्त हलचल तेज हो गई जब उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संवैधानिक प्रक्रिया के तहत उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। यह निर्णय संविधान के अनुच्छेद 67(b) के अंतर्गत लिया गया, जो उप-राष्ट्रपति के त्यागपत्र और उसे स्वीकार किए जाने की प्रक्रिया को स्पष्ट करता है।
🛑 राज्यसभा में औपचारिक घोषणा
राज्यसभा की कार्यवाही के दौरान भाजपा सांसद घनश्याम तिवारी ने यह जानकारी सदन को दी। उनके वक्तव्य के तुरंत बाद डिप्टी चेयरमैन हरिवंश नारायण सिंह ने सभापति की भूमिका संभाली और सदन की कार्यवाही को आगे बढ़ाया।
🗣️ राजनीतिक अटकलें तेज
धनखड़ के इस्तीफे की कोई पूर्व सूचना नहीं थी, जिसके कारण विभिन्न दलों में हलचल शुरू हो गई है। विपक्षी पार्टियों ने सवाल उठाया है कि क्या यह इस्तीफा किसी आंतरिक दबाव या आगामी राजनीतिक भूमिका की तैयारी का संकेत है। हालांकि, अभी तक स्वयं धनखड़ या सरकार की ओर से कोई विस्तृत स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है।
🔸 प्रधानमंत्री मोदी की श्रद्धांजलि जैसी प्रतिक्रिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा:
“जगदीप धनखड़ जी ने देश की सेवा अनेक रूपों में की है – वकील, सांसद, राज्यपाल और उप-राष्ट्रपति के रूप में उनका योगदान स्मरणीय रहेगा। उनके उज्ज्वल भविष्य और उत्तम स्वास्थ्य की कामना करता हूँ।”
📜 धनखड़ का कार्यकाल: एक दृष्टि
राजस्थान के झुंझुनूं जिले से आने वाले जगदीप धनखड़ ने एक प्रखर वकील से लेकर लोकसभा सांसद और फिर पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में लंबी सेवा दी। वर्ष 2022 में वे भारत के 14वें उप-राष्ट्रपति बने थे। उनके कार्यकाल में उन्होंने अक्सर संविधान और संसदीय परंपराओं की रक्षा को प्राथमिकता दी।
⏳ अब आगे क्या?
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि उप-राष्ट्रपति पद की रिक्ति को भरने के लिए निर्वाचन आयोग कब चुनावों की घोषणा करता है। साथ ही, यह भी अटकलों का विषय बन चुका है कि धनखड़ आगे क्या राजनीतिक भूमिका निभा सकते हैं – क्या वे किसी राज्य की राजनीति में लौटेंगे या केंद्र सरकार में कोई नई जिम्मेदारी संभालेंगे?
📌 निष्कर्ष
धनखड़ का इस्तीफा केवल एक प्रशासनिक कदम नहीं, बल्कि संभावित राजनीतिक घटनाक्रमों का संकेतक माना जा रहा है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि इस निर्णय के पीछे की असली पृष्ठभूमि क्या थी और भारतीय राजनीति में इसका प्रभाव कितना गहरा होगा।
