
वाशिंगटन, 23 जुलाई 2025 — अमेरिका की राजनीति में एक बार फिर गर्मी तब बढ़ गई जब पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बराक ओबामा पर देशद्रोह जैसे गंभीर आरोप लगाए। ट्रंप का आरोप है कि ओबामा प्रशासन ने 2016 के राष्ट्रपति चुनाव में रूस के संभावित हस्तक्षेप से जुड़ी खुफिया जानकारी के साथ छेड़छाड़ की थी। हालांकि, ओबामा के कार्यालय ने इन दावों को “निराधार” और “राजनीतिक भ्रम फैलाने की कोशिश” करार दिया है।
ओबामा कार्यालय की तीखी प्रतिक्रिया
पूर्व राष्ट्रपति ओबामा के प्रवक्ता पैट्रिक रोडेनबुश ने एक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि ट्रंप के आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। उन्होंने कहा,
“यह आरोप सिर्फ़ सस्ती राजनीतिक चाल है, जिससे जनता का ध्यान वास्तविक मुद्दों से हटाया जा सके।”
प्रवक्ता ने यह भी जोर दिया कि हालिया किसी भी आधिकारिक रिपोर्ट में इस बात का कोई प्रमाण नहीं मिला कि ओबामा प्रशासन ने किसी प्रकार की खुफिया जानकारी के साथ छेड़छाड़ की।
सीनेट रिपोर्ट ने किया था स्पष्टीकरण
2020 में अमेरिकी सीनेट की इंटेलिजेंस कमेटी द्वारा जारी की गई द्विदलीय रिपोर्ट में साफ कहा गया था कि रूस ने अमेरिकी चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश जरूर की, लेकिन कोई प्रत्यक्ष वोटिंग प्रणाली में हेरफेर नहीं हुई। रिपोर्ट उस समय रिपब्लिकन सीनेटर मार्को रुबियो की अध्यक्षता में तैयार की गई थी, जिससे इसकी निष्पक्षता पर सवाल नहीं उठाए जा सकते।
ट्रंप के नए आरोप और डीएनआई रिपोर्ट
हाल ही में राष्ट्रीय खुफिया निदेशक (DNI) तुलसी गैबार्ड द्वारा एक नई रिपोर्ट जारी की गई, जिसमें चुनावी प्रक्रिया में कथित धोखाधड़ी और “देशद्रोही साजिश” का दावा किया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ सरकारी अधिकारियों ने चुनाव परिणामों को प्रभावित करने की कोशिश की और अब यह मामला न्याय विभाग के पास भेजा गया है।
ट्रंप ने प्रेस को संबोधित करते हुए कहा:
“जो लोग हमारे देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया के साथ खिलवाड़ करते हैं, उन्हें जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए – चाहे वे कितने भी ऊंचे पदों पर क्यों न हों।”
राजनीतिक विश्लेषकों की राय
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप के यह आरोप 2024 के चुनाव में हार के बाद उनके समर्थकों को एकजुट करने की रणनीति हो सकती है। यह भी माना जा रहा है कि आगामी चुनावों से पहले ओबामा जैसे लोकप्रिय नेता पर हमला कर ट्रंप अपनी छवि मजबूत करना चाहते हैं।
निष्कर्ष
अमेरिका में चुनावी पारदर्शिता और सत्ता के दुरुपयोग पर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। जहां एक ओर ट्रंप अपने दावों को लेकर आक्रामक हैं, वहीं ओबामा पक्ष इन आरोपों को पूरी तरह नकार रहा है। अब देखना यह है कि न्यायिक प्रक्रिया इन विवादों को किस दिशा में ले जाती है।