
कोलकाता, 23 जुलाई 2025 — भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने पश्चिम बंगाल सरकार को निर्देश जारी किया है कि वह राज्य में मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय को पूर्ण रूप से एक स्वतंत्र इकाई बनाए, जो किसी भी राज्य विभाग के अधीनस्थ न हो। यह कदम चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और प्रशासनिक निष्पक्षता को सुदृढ़ करने की दिशा में उठाया गया है।
आयोग द्वारा भेजे गए आधिकारिक पत्र में कहा गया है कि वर्तमान व्यवस्था में सीईओ को स्वतंत्र वित्तीय व प्रशासनिक अधिकार प्राप्त नहीं हैं, जिससे उनके कार्यों में प्रभावशीलता की कमी आ रही है। अभी तक उनका कार्यालय राज्य के गृह और पर्वतीय मामलों के विभाग के अधीन कार्य करता है, जिससे जवाबदेही और स्वतंत्रता बाधित होती है।
🔹 स्वतंत्र चुनाव विभाग की आवश्यकता क्यों?
ECI ने यह स्पष्ट किया है कि CEO के पद की संवैधानिक भूमिका को देखते हुए उन्हें राज्य सरकार से पूरी तरह स्वतंत्र होना चाहिए। वर्तमान में उनके कार्यालय को वित्त विभाग से सीमित धनराशि अग्रिम के रूप में मिलती है, जिससे प्रशासनिक कार्यों में बाधाएं उत्पन्न होती हैं। आयोग का कहना है कि सीईओ को एक बजट प्रमुख (Drawing and Disbursing Officer) का दर्जा मिलना चाहिए, ताकि वे अपने कार्यालय से संबंधित सभी निर्णय स्वतंत्र रूप से ले सकें।
🔹 महत्वपूर्ण पदों की भरती का निर्देश
आयोग ने यह भी रेखांकित किया है कि राज्य में सीईओ कार्यालय के चार पद — अतिरिक्त, संयुक्त और उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी — लंबे समय से रिक्त हैं। इन पदों की शीघ्र नियुक्ति के लिए आयोग ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह ECI से परामर्श कर त्वरित कार्रवाई करे, विशेषकर आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए।
🔹 आयोग का सुझाव: वित्तीय सलाहकार की नियुक्ति
निर्वाचन आयोग ने सुझाव दिया है कि एक स्वतंत्र वित्तीय सलाहकार की नियुक्ति की जाए, जो सीईओ को प्रशासनिक योजनाओं और खर्चों की निगरानी में सहयोग दे सके। इससे सीईओ की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और गति दोनों ही सुनिश्चित हो सकेगी।
🔹 पृष्ठभूमि में राजनीतिक हलचल
यह निर्देश ऐसे समय पर आया है जब देशभर में मतदाता सूचियों की विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस तेज़ हो गई है। बिहार में इस प्रक्रिया पर विपक्षी दलों द्वारा सवाल उठाए गए हैं, और अब पश्चिम बंगाल में भी तृणमूल कांग्रेस द्वारा इसी तरह की समीक्षा की संभावना जताई जा रही है।
✅ निष्कर्ष
पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रणाली को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने की दिशा में यह निर्देश एक बड़ा कदम है। इससे न केवल सीईओ को प्रशासनिक स्वतंत्रता मिलेगी, बल्कि मतदाताओं का विश्वास भी बढ़ेगा। भारत निर्वाचन आयोग का यह कदम भारतीय लोकतंत्र को और मजबूत करने में सहायक सिद्ध हो सकता है।