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🌍 ईरान से लौट रहे अफगान शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र ने 10 मिलियन डॉलर की आपातकालीन सहायता घोषित की


काबुल, 23 जुलाई 2025 — ईरान से अफगान शरणार्थियों की बड़े पैमाने पर वापसी और उनसे जुड़ी मानवीय चुनौतियों के बीच, संयुक्त राष्ट्र ने 10 मिलियन डॉलर की आपातकालीन राहत राशि को मंजूरी दी है। यह सहायता उन हजारों अफगान नागरिकों को प्रदान की जाएगी, जिन्हें हाल के महीनों में ईरान से जबरन निकाला गया या उन्हें स्वेच्छा से वापसी के लिए बाध्य किया गया।

संयुक्त राष्ट्र की मानवीय मामलों की समन्वय इकाई (OCHA) के अनुसार, यह निधि विशेष रूप से उन क्षेत्रों में खर्च की जाएगी जहां शरणार्थी वापस आकर बस रहे हैं और उन्हें आवास, भोजन, पानी, चिकित्सा सहायता, मनोसामाजिक समर्थन और सुरक्षा सेवाओं की तत्काल आवश्यकता है।

✳️ लौटते शरणार्थियों की स्थिति बेहद चिंताजनक

रिपोर्टों के अनुसार, कई शरणार्थियों को ईरान में रहते समय शोषण, गिरफ्तारी, जबरन मजदूरी और उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। लौटते समय उनकी स्थिति दयनीय होती है — न पासपोर्ट, न संसाधन और न ही कोई ठिकाना।

नंगरहार, निमरोज और हेरात जैसे सीमावर्ती प्रांतों में स्थिति सबसे गंभीर है। इनमें से कई लोग बिना किसी सहारे या पहचान पत्र के देश में प्रवेश कर रहे हैं, जिससे मानवीय संकट और भी गहरा हो गया है।

🗣️ संयुक्त राष्ट्र की प्रतिक्रिया

संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के उप महासचिव मार्टिन ग्रिफिथ्स ने एक बयान में कहा,

“हम इस सहायता को उन अफगान नागरिकों तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं जिन्हें अत्यधिक असुरक्षा और संकट का सामना करना पड़ रहा है। यह केवल एक मानवीय दायित्व नहीं, बल्कि एक नैतिक जिम्मेदारी है।”

🤝 स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय सहयोग

संयुक्त राष्ट्र, अंतरराष्ट्रीय गैर-सरकारी संगठनों और अफगान रेड क्रिसेंट सोसाइटी के साथ मिलकर राहत कार्यों में तेजी ला रहा है। इसके अंतर्गत:

📉 भविष्य की चुनौतियाँ

हालांकि यह फंडिंग तत्काल राहत प्रदान करेगी, लेकिन दीर्घकालिक पुनर्वास के लिए बड़ी योजनाओं और अधिक वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता होगी। अफगानिस्तान पहले से ही राजनीतिक अस्थिरता, बेरोजगारी और खाद्य संकट से जूझ रहा है, ऐसे में लाखों शरणार्थियों की वापसी एक और बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है।


निष्कर्ष:
ईरान से लौट रहे अफगान शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र की यह आपातकालीन सहायता निस्संदेह एक जरूरी कदम है। यह संकट अंतरराष्ट्रीय समुदाय से और अधिक ध्यान, सहयोग और समर्थन की मांग करता है ताकि अफगानिस्तान के इन नागरिकों को एक सुरक्षित और गरिमामय जीवन की ओर लौटने का मौका मिल सके।


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