
कीव, 23 जुलाई 2025 (विशेष संवाददाता): यूक्रेन में भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने वाली मुख्य एजेंसियों की स्वायत्तता पर संकट मंडराने लगा है, जिससे यूरोपीय संघ सहित अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिंता की लहर दौड़ गई है। यूक्रेनी संसद द्वारा पारित एक विवादास्पद कानून के चलते राष्ट्रीय भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (NABU) और विशेष भ्रष्टाचार अभियोजक कार्यालय (SAPO) को कार्यकारी नियंत्रण के अधीन कर दिया गया है।
इस प्रस्ताव के समर्थन में मतदान के तुरंत बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए और लोकतंत्र समर्थकों ने इसे पारदर्शिता पर हमला बताया। विरोध करने वाले सांसदों ने इस फैसले को “लोकतंत्र के लिए अपमानजनक” करार दिया।
कुछ ही दिनों बाद राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने इस कानून पर आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर कर दिए। इसके 24 घंटे के भीतर ही यूक्रेन की सुरक्षा एजेंसी SBU ने NABU के मुख्यालय पर छापा मारा और दो वरिष्ठ जांचकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। इस कार्रवाई ने G7 देशों के राजनयिकों को भी सतर्क कर दिया, जिन्होंने सार्वजनिक बयान में कहा कि वे “स्थिति की गंभीरता से निगरानी कर रहे हैं।”
भ्रष्टाचार विरोधी कार्यकर्ताओं का आरोप है कि यह कदम स्वतंत्र एजेंसियों को निष्क्रिय करने की दिशा में उठाया गया है। एंटी-करप्शन एक्शन सेंटर ने बयान जारी कर कहा, “यह कानून NABU और SAPO को एक तरह से सरकार के अधीन कठपुतली संस्थाएं बना देगा। इससे भ्रष्टाचार पर लगाम कसने की स्वतंत्र कोशिशों का अंत हो जाएगा।”
गौरतलब है कि यह कानून एक आपात प्रस्ताव के रूप में संसद में लाया गया था, जिसका उद्देश्य आपराधिक कानून से मार्शल लॉ को हटाना बताया गया था। लेकिन अंतिम समय पर इसमें संशोधन कर NABU और SAPO की स्वतंत्रता समाप्त करने का प्रावधान जोड़ दिया गया।
यूक्रेनी सांसद अनास्तासिया रादिना ने संसद में इस विधेयक का कड़ा विरोध किया और चेताया कि यह “देश की भ्रष्टाचार विरोधी नींव को तोड़ देगा और इन संस्थाओं को एक प्रतीक मात्र बना देगा, जो अभियोजक जनरल के इशारों पर चलेंगी।”
यह उल्लेखनीय है कि NABU और SAPO की स्थापना वर्ष 2015 में पश्चिमी सहयोग और मार्गदर्शन से की गई थी, ताकि यूक्रेन में स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की व्यवस्था सुदृढ़ की जा सके। इन संस्थाओं को अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ से तकनीकी सहायता और प्रशिक्षण भी मिला था।
यूरोपीय आयोग की सदस्य मार्टा कोस ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा, “यह कानून यूक्रेन की यूरोपीय आकांक्षाओं के विपरीत है। NABU जैसी संस्थाओं की स्वतंत्रता को कमजोर करना, ईयू की बुनियादी शर्तों का उल्लंघन है।”
इस पूरे घटनाक्रम ने यूक्रेन की लोकतांत्रिक प्रतिबद्धताओं और यूरोपीय संघ में शामिल होने की प्रक्रिया को नई चुनौतियों के समक्ष ला खड़ा किया है। अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय किस तरह यूक्रेन पर अपनी पारदर्शिता और स्वायत्त संस्थानों को पुनः बहाल करने का दबाव बनाता है।