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कल्याण में निजी क्लिनिक की रिसेप्शनिस्ट पर बर्बर हमला: महिला सुरक्षा और स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल


कल्याण (ठाणे), महाराष्ट्र – 23 जुलाई 2025:
महाराष्ट्र के ठाणे ज़िले के कल्याण शहर में एक निजी क्लिनिक में कार्यरत महिला रिसेप्शनिस्ट पर एक युवक द्वारा किए गए कथित हमले ने पूरे क्षेत्र में आक्रोश और चिंता की लहर दौड़ा दी है। यह घटना ना केवल महिलाओं की कार्यस्थल पर सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता खड़ी करती है, बल्कि निजी स्वास्थ्य संस्थानों में कर्मचारियों को मिलने वाली सुरक्षा व्यवस्थाओं की भी पोल खोलती है।

घटना बुधवार को उस समय घटी जब पीड़िता, जिसकी पहचान सोनाली के रूप में हुई है, अपनी ड्यूटी कर रही थी। एक मरीज के रिश्तेदार — जिसकी पहचान गोकुल झा नामक व्यक्ति के रूप में की गई है — ने जब डॉक्टर से मिलने की जल्दी दिखाई और सोनाली ने उसे विनम्रता से इंतजार करने को कहा, तो आरोपी अचानक हिंसक हो उठा।

पीड़िता का बयान: “केवल अपनी ड्यूटी कर रही थी, पर हमला झेलना पड़ा”

सोनाली ने रोते हुए बताया,

“मैंने सिर्फ इतना कहा कि डॉक्टर अभी व्यस्त हैं और उन्हें इंतजार करना होगा। इस बात पर वह भड़क गया, अपशब्द कहने लगा और फिर मेरे ऊपर हमला कर दिया। जब लोगों ने उसे रोका और पुलिस बुलाने की बात की, तो वह वहां से भाग गया।”

चश्मदीदों और डॉक्टरों की प्रतिक्रिया

पीड़िता की बहन रूपाली, जो उसी क्लिनिक में काम करती हैं, ने बताया कि यह पूरी घटना उनके सामने घटी और वह स्तब्ध रह गईं।

“हमेशा से मरीजों और उनके परिजनों के साथ संयम से पेश आते हैं, पर आज जो हुआ वह भयावह था। मेरी बहन को इतनी बुरी तरह मारा गया कि उसे तुरंत अस्पताल ले जाना पड़ा।”

पीड़िता को उपचार के लिए एक नजदीकी निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उसका एक्स-रे और सीटी स्कैन कराया गया है। इलाज कर रहीं डॉ. रुताजा मनोहर ने बताया:

“सोनाली को छाती, पेट और सिर में दर्द की शिकायत है। हम उसे निगरानी में रखे हुए हैं। उसकी स्थिति फिलहाल स्थिर है, पर हम MRI और HRCटी स्कैन भी कराएंगे।”

पुलिस जांच और आरोपी की तलाश जारी

स्थानीय पुलिस ने पीड़िता के बयान के आधार पर आईपीसी की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारी ने जानकारी दी कि आरोपी फिलहाल फरार है, लेकिन उसकी तलाश की जा रही है। इलाके के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और चश्मदीदों से पूछताछ की जा रही है।

व्यापक प्रभाव और ज़रूरत सख्त कानूनों की

इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना ने एक बार फिर स्वास्थ्य सेवा से जुड़े कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर उठने वाले सवालों को जीवंत कर दिया है। निजी और सरकारी दोनों ही अस्पतालों में ऐसे मामले बार-बार सामने आते हैं, जहां स्टाफ को मरीजों या उनके परिजनों के क्रोध का सामना करना पड़ता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे हमलों को रोकने के लिए कठोर कानूनों और अस्पतालों में सुरक्षा के बेहतर इंतजाम की सख्त ज़रूरत है। इसके साथ ही जनता को भी यह समझना होगा कि चिकित्सा कर्मचारी केवल अपनी जिम्मेदारी निभा रहे होते हैं, और उनके साथ हिंसा करना किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं हो सकता।


निष्कर्ष:
कल्याण की इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि केवल कानून बनाना काफी नहीं है — उन्हें प्रभावी ढंग से लागू करना और अस्पतालों में सुरक्षा को प्राथमिकता देना बेहद आवश्यक है। महिला कर्मचारियों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सिर्फ कानून व्यवस्था की नहीं, बल्कि समाज की भी जिम्मेदारी है।


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