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भारत ने पाकिस्तानी विमानों पर हवाई प्रतिबंध बढ़ाया: सुरक्षा मजबूरी या रणनीतिक संदेश?


नई दिल्ली, 23 जुलाई 2025 (एएनआई): भारत सरकार ने पाकिस्तान से आने वाले विमानों पर अपने हवाई क्षेत्र में प्रतिबंध को 24 जुलाई तक बढ़ा दिया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण हालात बने हुए हैं। नागर विमानन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने इस निर्णय की पुष्टि करते हुए कहा कि यह “राष्ट्रीय सुरक्षा प्राथमिकताओं और रणनीतिक दृष्टिकोण” से लिया गया है।

यह कोई पहली बार नहीं है जब भारत ने पाकिस्तानी विमानों के प्रवेश पर रोक लगाई हो। इससे पूर्व यह प्रतिबंध 1 मई से 23 मई तक प्रभावी था, जो कि “ऑपरेशन सिंदूर” के बाद लगाया गया था। उक्त सैन्य अभियान का उद्देश्य सीमा पार आतंकी गतिविधियों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई करना था, खासकर उस घटना के बाद जिसमें पहलगाम में 26 लोगों की जान चली गई थी—उनमें एक विदेशी नागरिक भी शामिल था।

हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के प्रति सख्त रुख अपनाते हुए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए थे। इनमें सिंधु जल समझौते की समीक्षा, अटारी सीमा के माध्यम से आवागमन पर रोक और राजनयिक स्तर घटाने जैसे निर्णय शामिल थे। “ऑपरेशन सिंदूर” भी इसी नीति का हिस्सा था, जिसमें आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया।

वर्तमान में भारत का हवाई क्षेत्र पाकिस्तान से संचालित, स्वामित्व वाले या किराए पर लिए गए नागरिक और सैन्य विमानों के लिए बंद है। यह प्रतिबंध 30 अप्रैल से लागू है और इसका सीधा असर पाकिस्तान की हवाई सेवाओं पर देखने को मिल रहा है, जिससे कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानें लंबा रास्ता अपनाने को मजबूर हैं।

सरकार इस विषय पर आगामी मानसून सत्र में 16 घंटे लंबी चर्चा की योजना बना रही है, जिसका केंद्रबिंदु “ऑपरेशन सिंदूर” और उसकी सफलता/चुनौतियां होंगी। विपक्ष की ओर से प्रधानमंत्री की मौजूदगी में बहस की मांग की जा रही है, हालांकि सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उस दौरान दो दिवसीय विदेश दौरे पर रह सकते हैं।

इस ताजा निर्णय से साफ है कि भारत अपनी हवाई सीमा को सिर्फ परिवहन के साधन के रूप में नहीं, बल्कि एक रणनीतिक संसाधन के रूप में देखता है। यह प्रतिबंध दर्शाता है कि भारत किसी भी खतरे के प्रति सतर्क रहते हुए, कूटनीतिक और सामरिक स्तर पर आवश्यक कदम उठाने को तैयार है।

अब देखना यह होगा कि इस फैसले का दक्षिण एशिया की राजनीतिक स्थिरता और भारत-पाकिस्तान संबंधों पर आगे क्या प्रभाव पड़ता है।


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