HIT AND HOT NEWS

बर्लिन में फ्रांसीसी-जर्मन साझेदारी की नई लहर: मैक्रों और मर्ज़ की ऐतिहासिक मुलाक़ात


24 जुलाई 2025 को बर्लिन ने एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक क्षण का साक्षी बना, जब फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और जर्मनी के राजनेता फ्रेडरिक मर्ज़ ने मिलकर एक मज़बूत यूरोपीय रक्षा और सुरक्षा ढांचे की दिशा में ठोस पहल की। इस मुलाक़ात की तस्वीर और संदेश को राष्ट्रपति मैक्रों ने स्वयं सोशल मीडिया पर साझा किया, जो तेज़ी से वायरल हो गया।

इस अवसर पर राष्ट्रपति मैक्रों ने लिखा:
“बर्लिन में एक साथ – जर्मन-फ्रांसीसी रिफ्लेक्स एक्शन में, मंत्री परिषद और जर्मन-फ्रांसीसी रक्षा और सुरक्षा परिषद की तैयारी में जुटे। 29 अगस्त को टूलॉन में मुलाकात होगी, प्रिय फ्रेडरिक!”

यूरोप के लिए एक साझा दृष्टिकोण

यह बैठक केवल एक औपचारिक शिष्टाचार नहीं थी, बल्कि यूरोप की सामूहिक सुरक्षा को लेकर एक रणनीतिक विमर्श का हिस्सा थी। यूक्रेन युद्ध, नाटो में नए संतुलन और वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों के बीच जर्मनी और फ्रांस का यह सहयोग यूरोप की आत्मनिर्भर सुरक्षा नीति की दिशा में एक निर्णायक कदम है।

मंत्री परिषद और सुरक्षा परिषद की तैयारियाँ

दोनों नेता आगामी Franco-German Ministerial Council और Defence and Security Council की रूपरेखा तय करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। यह दोनों संस्थाएं न केवल द्विपक्षीय सहयोग को मज़बूत करेंगी बल्कि यूरोपीय संघ के भीतर सामंजस्य और त्वरित निर्णय क्षमता को भी गति देंगी।

राजनीतिक संदेश और सौहार्द्र

मैक्रों और मर्ज़ की हाथ मिलाते हुए ली गई तस्वीर महज़ औपचारिकता नहीं, बल्कि एक मजबूत राजनीतिक संकेत भी है। यह दिखाता है कि दोनों देशों के बीच पारंपरिक सहयोग अब एक अधिक रणनीतिक, संगठित और संयुक्त दिशा में बढ़ रहा है।

29 अगस्त: टूलॉन में अगली बैठक

इस कूटनीतिक श्रृंखला की अगली कड़ी अब टूलॉन (फ्रांस) में 29 अगस्त को होगी, जहाँ दोनों पक्ष रक्षा और समुद्री सुरक्षा पर विशेष चर्चा करेंगे। टूलॉन फ्रांसीसी नौसेना का प्रमुख अड्डा है, इसलिए यह बैठक विशेष प्रतीकात्मक और रणनीतिक महत्त्व रखती है।


निष्कर्ष

फ्रांस और जर्मनी की यह साझेदारी न केवल यूरोप की सुरक्षा नीति को नए आयाम दे रही है, बल्कि यह संदेश भी दे रही है कि एकजुट होकर ही वैश्विक चुनौतियों का सामना किया जा सकता है। बर्लिन में यह ऐतिहासिक क्षण निश्चय ही आने वाले समय में यूरोपीय राजनीति की दिशा तय करेगा।


Exit mobile version