
प्रकाशित तिथि: 24 जुलाई 2025
घाना इस समय अपने इतिहास के सबसे भीषण सूखा संकट का सामना कर रहा है, जिससे देश के प्रमुख खाद्य उत्पादन क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। यह पर्यावरणीय संकट न केवल घाना की खाद्य सुरक्षा को खतरे में डाल रहा है, बल्कि उसकी आर्थिक स्थिरता पर भी गहरा असर डाल रहा है। सूखे के कारण फसलें बर्बाद हो रही हैं, जिससे खाद्य संकट और लाखों नागरिकों की आजीविका पर गंभीर संकट मंडरा रहा है।
इस गहराते संकट को देखते हुए, विश्व बैंक ने 85 मिलियन डॉलर (लगभग 710 करोड़ रुपये) की आपात सहायता राशि देने की घोषणा की है। यह धनराशि विशेष रूप से सूखे के कारण हुए नुकसान की भरपाई और कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए दी जा रही है। इसका लाभ सीधे तौर पर लगभग 5 लाख छोटे किसान परिवारों को मिलेगा, जो देश की खाद्य आपूर्ति श्रृंखला की रीढ़ माने जाते हैं।
सहायता पैकेज में क्या मिलेगा:
इस सहायता पैकेज के अंतर्गत किसानों को दो प्रमुख संसाधन प्रदान किए जाएंगे:
- उन्नत बीज (Improved Seeds): ये बीज सूखे जैसी प्रतिकूल जलवायु परिस्थितियों में भी बेहतर उपज देने में सक्षम होते हैं।
- उर्वरक (Fertilizers): सूखे के कारण मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। उर्वरक इस कमी को दूर करने में मदद करेंगे, जिससे फसल उत्पादन बढ़ सके।
इस पहल का उद्देश्य केवल तत्काल राहत देना नहीं है, बल्कि कृषि को जलवायु-संवेदनशील और टिकाऊ बनाने की दिशा में एक ठोस कदम उठाना भी है। इससे किसानों को भविष्य की प्राकृतिक आपदाओं से लड़ने में अधिक सक्षम बनाया जाएगा।
वैश्विक सहयोग की आवश्यकता
विश्व बैंक का यह कदम यह दर्शाता है कि जलवायु परिवर्तन जैसे वैश्विक संकटों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग कितना आवश्यक है, खासकर उन देशों के लिए जो पहले से ही सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर हैं। यह निवेश घाना की खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ उसकी दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता में भी सहायक होगा।
निष्कर्ष
घाना में सूखा केवल एक पर्यावरणीय संकट नहीं, बल्कि मानव जीवन और आजीविका पर सीधा प्रभाव डालने वाला आपातकाल है। विश्व बैंक की यह सहायता किसानों के लिए एक जीवनरेखा साबित हो सकती है। यदि इस मॉडल को अन्य देशों में भी अपनाया जाए, तो जलवायु परिवर्तन के खतरे से जूझ रहे विश्व के कई हिस्सों को राहत मिल सकती है।