
प्रकाशन तिथि: 24 जुलाई 2025
स्थान: जकार्ता, इंडोनेशिया
दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों को एक सशक्त और सतत भविष्य की दिशा में आगे ले जाने के लिए नवाचार और विज्ञान-प्रौद्योगिकी को केंद्र में रखना अब आवश्यकता नहीं, बल्कि अनिवार्यता बन चुका है। इसी सोच को बल देते हुए एशियाई विकास बैंक (ADB) के अध्यक्ष मसातो कांडा ने जकार्ता में आयोजित साइंस एंड टेक्नोलॉजी इन सोसाइटी (STS) फोरम में एक विचारोत्तेजक मुख्य भाषण दिया।
नवाचार: समृद्धि और लचीलापन का आधार
अपने संबोधन में कांडा ने ज़ोर देकर कहा, “नवाचार को दक्षिण-पूर्व एशिया की विकास रणनीति के केंद्र में रखना होगा यदि हम दीर्घकालिक लचीलापन और समावेशी समृद्धि प्राप्त करना चाहते हैं।” उन्होंने बताया कि कैसे विज्ञान और तकनीक के माध्यम से अधोसंरचना की खाई पाटी जा सकती है, जलवायु परिवर्तन के प्रति अनुकूलन बढ़ाया जा सकता है, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर बनाई जा सकती हैं।
निवेश और सहयोग: विकास का मूल मंत्र
कांडा ने सरकारों, निजी क्षेत्र और अंतरराष्ट्रीय विकास संस्थाओं के बीच सशक्त साझेदारी को समय की मांग बताया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि जब तक अनुसंधान, नवाचार-आधारित पारिस्थितिकी तंत्र और डिजिटल अवसंरचना में स्थायी और रणनीतिक निवेश नहीं किया जाएगा, तब तक तकनीकी प्रगति के लाभ पूर्ण रूप से नहीं मिल पाएंगे।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि सदस्य देशों को नीति निर्माण में नवाचार को प्राथमिकता देनी चाहिए और क्षेत्रीय स्तर पर प्रौद्योगिकी साझाकरण और वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देना चाहिए।
क्षेत्रीय चुनौतियाँ, साझा समाधान
जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक असमानता जैसी चुनौतियों का सामना अकेले नहीं किया जा सकता। कांडा ने क्षेत्रीय एकता की आवश्यकता पर ज़ोर देते हुए कहा कि इन समस्याओं का समाधान सीमाओं के पार सामूहिक दृष्टिकोण से ही संभव है।
एडीबी की नई विकास दृष्टि
ADB का यह नया दृष्टिकोण यह दर्शाता है कि विज्ञान, तकनीक और नवाचार अब विकास योजनाओं के परिधि में नहीं, बल्कि केंद्र में हैं। कांडा का यह संदेश इस बात की पुष्टि करता है कि एडीबी “स्मार्ट, हरित और न्यायसंगत विकास” के लिए प्रतिबद्ध है — जहां तकनीक केवल प्रगति का साधन नहीं, बल्कि समाज को सशक्त बनाने का जरिया होगी।
निष्कर्ष:
मसातो कांडा की यह अपील न केवल नीति निर्माताओं के लिए चेतावनी है, बल्कि विकासशील देशों के लिए अवसर भी है — एक ऐसा अवसर जिसमें नवाचार आधारित नीतियों से भविष्य की चुनौतियों का सामना आत्मविश्वास और सहयोग से किया जा सकता है। दक्षिण-पूर्व एशिया यदि इस दिशा में ठोस कदम उठाता है, तो यह क्षेत्र एक वैश्विक नवाचार मॉडल बनकर उभर सकता है।