
प्रस्तावना:
भारत, एक विशाल भू-आकृतिक और भौगोलिक विविधता वाला देश है, जहाँ हिमालय की बर्फीली चोटियाँ भी हैं और तटीय क्षेत्रों की गर्म आर्द्र हवाएँ भी। इस विविध भू-स्वरूप और समुद्र तल से ऊँचाई-नीचाई के कारण भारत में जलवायु के कई क्षेत्र (Climatic Zones) पाए जाते हैं। ये क्षेत्र न केवल भौगोलिक विशेषताओं के कारण भिन्न होते हैं, बल्कि वर्षा, तापमान और हवाओं के बहाव जैसे कारकों पर भी आधारित होते हैं।
भारत के प्रमुख जलवायु क्षेत्र
भारत को जलवायु के आधार पर पाँच प्रमुख क्षेत्रों में बाँटा जा सकता है:
1. उष्णकटिबंधीय आर्द्र जलवायु क्षेत्र (Tropical Wet Climate Zone)
स्थान: पश्चिमी तट (केरल, कर्नाटक, गोवा), पूर्वोत्तर राज्य (असम, मेघालय, त्रिपुरा आदि)
विशेषताएँ:
- अत्यधिक वर्षा (200 से 300 सेमी प्रतिवर्ष)
- वर्षभर उच्च तापमान
- मानसूनी प्रभाव बहुत तीव्र
उदाहरण: चेरापूंजी और मासिनराम – विश्व के सबसे अधिक वर्षा वाले स्थान
2. उष्णकटिबंधीय शुष्क जलवायु क्षेत्र (Tropical Dry or Arid Zone)
स्थान: राजस्थान, गुजरात, मध्य भारत के कुछ भाग
विशेषताएँ:
- कम वर्षा (20 से 100 सेमी प्रतिवर्ष)
- गर्म दिन और ठंडी रातें
- रेगिस्तानी वायु और धूल भरी आँधियाँ
उदाहरण: थार मरुस्थल
3. उपोष्णकटिबंधीय आर्द्र जलवायु क्षेत्र (Subtropical Humid Zone)
स्थान: उत्तर भारत (पंजाब, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल)
विशेषताएँ:
- ग्रीष्मकाल में गर्म और शुष्क मौसम
- शीतकाल में हल्की ठंड और कुछ जगहों पर कोहरा
- वर्षा का प्रमुख स्रोत दक्षिण-पश्चिम मानसून
विशेष: यह क्षेत्र कृषि के लिए अत्यंत उपयुक्त है – विशेषकर गेहूँ, चावल और गन्ने की खेती।
4. शीतोष्ण जलवायु क्षेत्र (Temperate Zone or Mountain Climate)
स्थान: हिमालय क्षेत्र (जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम)
विशेषताएँ:
- ठंडी जलवायु, विशेषकर शीतकाल में हिमपात
- वर्षा कम लेकिन बर्फबारी अधिक
- गर्मी का मौसम भी ठंडा और सुखद
उदाहरण: गुलमर्ग, मनाली, गंगटोक
5. तटीय जलवायु क्षेत्र (Coastal Climate Zone)
स्थान: पूर्वी और पश्चिमी समुद्री तट – तमिलनाडु, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, केरल
विशेषताएँ:
- उच्च आर्द्रता
- कम तापमान में उतार-चढ़ाव
- वर्षभर समुद्री हवाओं का प्रभाव
विशेष: चक्रवात और तूफान जैसी मौसमी घटनाएँ अक्सर यहाँ देखी जाती हैं।
भारत की जलवायु विविधता का महत्व
- कृषि पर प्रभाव: विभिन्न जलवायु क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार की फसलों की खेती होती है, जैसे कि पंजाब में गेहूँ और धान, जबकि महाराष्ट्र में गन्ना और कपास।
- पर्यटन उद्योग: हिमालयी शीत जलवायु और तटीय आर्द्र मौसम दोनों ही पर्यटन के बड़े केंद्र हैं।
- वनस्पति और जैव विविधता: हर जलवायु क्षेत्र की अपनी विशिष्ट जैवविविधता है – जैसे पश्चिमी घाटों में सदाबहार वन और थार में कैक्टस और झाड़ियाँ।
निष्कर्ष:
भारत की जलवायु विविधता न केवल देश की भौगोलिक सुंदरता को बढ़ाती है, बल्कि इसकी सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक समृद्धि की भी आधारशिला है। हर जलवायु क्षेत्र की अपनी विशेषताएँ, समस्याएँ और संभावनाएँ हैं – और यही विविधता भारत को जलवायु के दृष्टिकोण से एक अद्वितीय राष्ट्र बनाती है।