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ज़ेलेंस्की का यू-टर्न: भ्रष्टाचार रोधी संस्थानों की स्वायत्तता बहाल करने की पहल


कीव, 25 जुलाई 2025
यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने भ्रष्टाचार विरोधी एजेंसियों की स्वतंत्रता को पुनर्स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। गुरुवार को उन्होंने एक नए विधेयक पर हस्ताक्षर किए, जो इन एजेंसियों को सरकारी हस्तक्षेप से संरक्षित रखने के लिए कई अहम बदलाव लाता है। यह निर्णय उस समय आया जब देश भर में व्यापक विरोध प्रदर्शन हो रहे थे और पश्चिमी देशों की आलोचना ज़ोर पकड़ रही थी।

इस नई पहल से दो दिन पहले ही ज़ेलेंस्की ने एक विवादास्पद कानून को मंजूरी दी थी, जिसमें अभियोजक जनरल कार्यालय को राष्ट्रीय भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (NABU) और विशेष भ्रष्टाचार अभियोजक कार्यालय (SAPO) के कार्यों में हस्तक्षेप की छूट दी गई थी। यह कदम तब उठाया गया जब NABU के दफ्तरों में छापेमारी हुई थी और ब्यूरो के एक वरिष्ठ अधिकारी को रूस के लिए जासूसी करने के आरोप में हिरासत में लिया गया था।

नए कानून के तहत ज़ेलेंस्की ने वादा किया है कि भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ रही संस्थाओं को “पूर्ण कानूनी सुरक्षा” प्रदान की जाएगी। उन्होंने इसे यूक्रेनी व्यवस्था को “रूसी प्रभाव से मुक्त रखने” की दिशा में एक रणनीतिक प्रयास बताया। इसके साथ ही अब इन एजेंसियों के कर्मचारियों के लिए पॉलीग्राफ (झूठ पकड़ने वाला परीक्षण) अनिवार्य कर दिया गया है।

राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने कहा,

“यह विधेयक हमारे राष्ट्रीय हितों की रक्षा करता है और इसे बनाते समय हमने यूक्रेन के भागीदारों, यूरोपीय विशेषज्ञों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों की राय को प्राथमिकता दी है। यूके, जर्मनी और यूरोपीय संघ के सुझावों को ध्यान में रखते हुए संशोधन किए गए हैं।”

यह नीतिगत पलटाव ऐसे समय में हुआ है जब कीव, ओडेसा, ल्वीव और निप्रो जैसे प्रमुख शहरों में हजारों नागरिक भ्रष्टाचार विरोधी निकायों की स्वतंत्रता को लेकर सड़कों पर उतर आए थे। जनदबाव और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया ने ज़ेलेंस्की प्रशासन को पुनर्विचार के लिए मजबूर कर दिया।

आलोचकों का आरोप है कि ज़ेलेंस्की अपनी सत्ता को मजबूत करने के लिए संस्थागत नियंत्रण बढ़ा रहे हैं। वहीं, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इस विषय पर सार्वजनिक तौर पर असंतोष प्रकट करते हुए चेतावनी दी थी कि यदि यूक्रेन “कानून के शासन” का सम्मान नहीं करता, तो यह उसकी यूरोपीय संघ में सदस्यता की संभावनाओं को नुकसान पहुंचा सकता है।

गौरतलब है कि NABU और SAPO जैसी एजेंसियों की स्थापना 2014 में यूक्रेन में हुई राजनीतिक उथल-पुथल के बाद की गई थी, जिनका उद्देश्य उच्च-स्तरीय भ्रष्टाचार की जांच करना और पारदर्शिता को बढ़ावा देना था।


निष्कर्ष:
ज़ेलेंस्की का यह यू-टर्न न केवल घरेलू असंतोष को शांत करने की कोशिश है, बल्कि पश्चिमी देशों के साथ संबंधों को स्थिर बनाए रखने का प्रयास भी प्रतीत होता है। यह देखना दिलचस्प होगा कि आगामी दिनों में यह निर्णय यूक्रेन की आंतरिक राजनीति और उसकी यूरोपीय आकांक्षाओं को किस दिशा में ले जाता है।


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