
अंतरिक्ष विज्ञान में सहयोग और नवाचार का अद्भुत उदाहरण है – निसार मिशन (NISAR Mission)। यह मिशन अमेरिका की नासा (NASA) और भारत की इसरो (ISRO) द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया गया है और यह वैश्विक स्तर पर पृथ्वी की निगरानी को एक नई दिशा देने वाला है।
🌍 क्या है निसार (NISAR)?
निसार (NASA-ISRO Synthetic Aperture Radar) दुनिया का पहला ऐसा पृथ्वी अवलोकन उपग्रह है जिसमें दोहरी बैंड सिंथेटिक अपर्चर रडार (Dual-band SAR) प्रणाली मौजूद है। इस प्रणाली में नासा का एल-बैंड (L-band) और इसरो का एस-बैंड (S-band) रडार शामिल है। यह तकनीक पृथ्वी की सतह पर हो रहे अत्यंत सूक्ष्म परिवर्तनों को बेहद सटीकता से माप सकेगी।
🚀 तीन ऐतिहासिक पहलें:
- ✅ यह दुनिया का पहला उपग्रह है जिसमें एल-बैंड और एस-बैंड दोनों रडार एक साथ हैं।
- ✅ पहली बार भारत का GSLV रॉकेट किसी पेलोड को सन-सिंक्रोनस ऑर्बिट (SSO) में स्थापित करेगा।
- ✅ यह नासा और इसरो के बीच पहला संयुक्त पृथ्वी अवलोकन मिशन है – विज्ञान के क्षेत्र में सीमाओं के पार सहयोग का प्रतीक।
🔍 मिशन का उद्देश्य क्या है?
निसार मिशन का प्रमुख उद्देश्य है पृथ्वी की सतह पर हो रहे परिवर्तनों की निगरानी। इसके अंतर्गत:
- भूकंप, ज्वालामुखी और भू-धंसाव जैसे भूगर्भीय घटनाओं की पूर्व जानकारी
- बर्फ की परतों और ग्लेशियरों में हो रहे परिवर्तनों का विश्लेषण
- वनों, कृषि भूमि और जल संसाधनों की स्थिति पर निगरानी
- जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण संरक्षण और आपदा प्रबंधन में वैज्ञानिक सहायता
🔧 कैसे हुआ निर्माण?
निसार का निर्माण भारत और अमेरिका में अलग-अलग भागों में किया गया, फिर इन्हें मिलाकर एक उपग्रह के रूप में एकीकृत किया गया। यह एक वर्षों की योजना, अनुसंधान, इंजीनियरिंग और परीक्षणों का परिणाम है। फिलहाल यह उपग्रह अंतिम परीक्षणों की प्रक्रिया में है और जल्द ही इसे GSLV के ज़रिए लॉन्च किया जाएगा।
🌐 निसार: विज्ञान से परे एक दृष्टि
निसार सिर्फ एक वैज्ञानिक परियोजना नहीं है, बल्कि यह बताता है कि जब दो राष्ट्र मिलकर कार्य करते हैं तो वे मानवता की भलाई के लिए अंतरिक्ष विज्ञान का उपयोग कैसे कर सकते हैं। यह मिशन न केवल आंकड़े देगा, बल्कि एक ऐसा उदाहरण स्थापित करेगा कि तकनीकी सहयोग से पृथ्वी की रक्षा कैसे की जा सकती है।
निष्कर्ष
निसार मिशन आने वाले वर्षों में पृथ्वी की परिस्थितियों को समझने और उसे संरक्षित करने में एक क्रांतिकारी कदम सिद्ध होगा। यह परियोजना यह भी दर्शाती है कि विज्ञान की कोई सीमा नहीं होती, और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से हम किसी भी चुनौती का समाधान खोज सकते हैं।