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🕊️ कंबोडिया-थाईलैंड संघर्ष में ट्रंप की मध्यस्थता: भारत-पाकिस्तान विवाद से की तुलना


वाशिंगटन डीसी, 27 जुलाई 2025 — दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के दो ऐतिहासिक विरोधों के बीच एक दिलचस्प समानता तब उभरकर सामने आई जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने थाईलैंड और कंबोडिया के बीच चल रहे सीमा संघर्ष को भारत-पाकिस्तान विवाद से जोड़ते हुए, शांति स्थापित करने के लिए एक बार फिर व्यापारिक दबाव की नीति अपनाई।

थाईलैंड और कंबोडिया के बीच सीमा विवाद कोई नया नहीं है। इसका इतिहास उपनिवेशकालीन फ्रांस द्वारा की गई सीमांकन प्रक्रिया से जुड़ा है, जो आज भी दोनों देशों के बीच तनाव का कारण बना हुआ है। पिछले गुरुवार से शुरू हुए इस ताजा संघर्ष में अब तक दर्जनों लोग मारे जा चुके हैं, सैकड़ों घायल हुए हैं और लगभग 1.5 लाख लोग विस्थापित हो चुके हैं।

इस हिंसा के बीच ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर लगातार पोस्ट करते हुए खुलासा किया कि वे कंबोडिया के प्रधानमंत्री हुन मानेत और थाईलैंड के कार्यवाहक प्रधानमंत्री फुमथम वेचायाचाई से शांति वार्ता में जुटे हुए हैं। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका दोनों देशों के साथ व्यापार समझौते पर वार्ता कर रहा है, लेकिन जब तक संघर्ष नहीं रुकता, तब तक अमेरिका कोई व्यापारिक समझौता नहीं करेगा।

ट्रंप ने इस पूरे घटनाक्रम की तुलना भारत-पाकिस्तान के बीच हाल ही में मई माह में हुए संघर्ष से की। उन्होंने कहा, “यह विवाद मुझे भारत और पाकिस्तान के बीच हुए संघर्ष की याद दिलाता है, जिसे हमने शांति की ओर ले जाने में सफलता पाई थी।”

गौरतलब है कि मई 2025 में पुलवामा जैसे एक बड़े आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव काफी बढ़ गया था। 26 नागरिकों की मौत के बाद भारत ने जवाबी सैन्य कार्रवाई की, जिसके बाद युद्ध जैसे हालात बन गए थे। ट्रंप ने तब दावा किया था कि उन्होंने व्यापारिक दबाव के माध्यम से दोनों परमाणु राष्ट्रों के बीच संघर्ष को टालने और संघर्षविराम करवाने में अहम भूमिका निभाई।

अब कंबोडिया और थाईलैंड के मामले में भी ट्रंप वैसी ही भूमिका निभाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि जब तक दोनों देश युद्ध विराम पर सहमत नहीं होते, तब तक अमेरिका उनसे कोई व्यापारिक समझौता नहीं करेगा।

यह बयान न केवल अमेरिका की वैश्विक राजनीति में भूमिका को रेखांकित करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि कैसे अंतरराष्ट्रीय व्यापार को एक कूटनीतिक हथियार की तरह प्रयोग किया जा सकता है।


निष्कर्ष:
डोनाल्ड ट्रंप की यह पहल भले ही विवादित हो, लेकिन इसमें कोई संदेह नहीं कि व्यापारिक प्रभाव के माध्यम से शांति स्थापना की उनकी नीति वैश्विक कूटनीति में एक नई दिशा की ओर संकेत करती है। अब देखना यह होगा कि कंबोडिया और थाईलैंड उनके इस प्रयास को कितनी गंभीरता से लेते हैं, और क्या यह पहल भारत-पाक संघर्ष की तरह ही शांति की ओर बढ़ सकेगी।


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