
27 जुलाई 2025 को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहल के तहत तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोआन से गाज़ा पट्टी की मौजूदा स्थिति और दो-राष्ट्र सिद्धांत पर आधारित समाधान पर चर्चा की। मैक्रों ने इस बात को सार्वजनिक करते हुए एक्स (पूर्व ट्विटर) पर साझा किया कि उन्होंने एर्दोआन से गाज़ा में शांति स्थापना और इज़रायल-फिलिस्तीन के बीच सुरक्षा सुनिश्चित करने को लेकर विचार-विमर्श किया है।
राष्ट्रपति मैक्रों ने पोस्ट में यह भी ज़ोर दिया कि “इज़रायलियों और फिलिस्तीनियों की शांति और सुरक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाया जाना चाहिए।”
दुनिया भर से प्रतिक्रियाएं
इस ट्वीट के कुछ ही घंटों में लाखों लोगों ने इसे देखा और हजारों प्रतिक्रियाएं आने लगीं। जहां कुछ ने इस संवाद की सराहना की, वहीं कई लोगों ने इसे आलोचनात्मक नजरिए से देखा। एक यूक्रेनी उपयोगकर्ता ने टिप्पणी की कि दुनिया का असली खतरा वर्तमान में रूस द्वारा यूक्रेन पर थोपे गए युद्ध से है, गाज़ा नहीं। इसने यह दिखाया कि किस तरह विभिन्न देशों की जनता अपने-अपने क्षेत्रीय संकटों को प्राथमिकता देती है।
दूसरी ओर, एक फ्रांसीसी उपयोगकर्ता ने कटाक्ष करते हुए मैक्रों से कहा कि वे फ्रेंच भाषा में बात करें, यह दर्शाता है कि अपने ही देश के लोग कभी-कभी अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपने नेताओं की भाषाई प्राथमिकताओं से भी असहमति रखते हैं।
एक अन्य प्रतिक्रिया में एक उपयोगकर्ता ने व्यंग्यात्मक अंदाज़ में कहा कि चाहे राष्ट्रपति किसी भी भाषा में बोलें, वे पहले से जानते हैं कि उनसे असहमत ही रहेंगे।
बातचीत का महत्व
फ्रांस और तुर्की, दोनों ही देशों की क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में अहम भूमिका रही है। गाज़ा पट्टी में वर्षों से चला आ रहा संघर्ष वैश्विक शांति के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। ऐसे में दो प्रमुख नेताओं का इस मुद्दे पर खुलकर संवाद करना, एक सकारात्मक पहल के रूप में देखा जा सकता है।
आगे की राह
गाज़ा संकट का हल केवल युद्धविराम या मानवीय सहायता तक सीमित नहीं हो सकता। एक स्थायी समाधान के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति, संवाद और दो-राष्ट्र सिद्धांत जैसे उपायों पर गंभीरता से काम करना होगा। राष्ट्रपति मैक्रों और एर्दोआन की बातचीत इसी दिशा में एक प्रयास है, जिससे आने वाले समय में इज़रायल और फिलिस्तीन के बीच स्थायी शांति की संभावनाएं मजबूत हो सकती हैं।
निष्कर्ष:
हालांकि सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं मिली-जुली रहीं, लेकिन वैश्विक कूटनीति में इस प्रकार की बातचीत महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह संवाद न केवल गाज़ा संकट को सुलझाने में मददगार हो सकता है, बल्कि व्यापक मध्य-पूर्व शांति प्रयासों को भी गति दे सकता है।