HIT AND HOT NEWS

डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की पुण्यतिथि पर प्रधानमंत्री मोदी की श्रद्धांजलि: एक प्रेरणा का पुनर्स्मरण


नई दिल्ली, 27 जुलाई 2025 – भारत के महान वैज्ञानिक, राष्ट्रपति और प्रेरणापुंज डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की पुण्यतिथि पर आज राष्ट्रभर में उन्हें श्रद्धा, सम्मान और भावनाओं के साथ याद किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर डॉ. कलाम के अद्वितीय योगदानों को स्मरण करते हुए उन्हें हार्दिक श्रद्धांजलि अर्पित की।

प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा:

“डॉ. कलाम जी ने हमें यह सिखाया कि एक सपने को साकार करने के लिए जुनून और परिश्रम सबसे जरूरी हैं। उनका जीवन भारत के लिए एक संकल्प और युवाओं के लिए एक ज्योति-पुंज है।”


एक सामान्य बालक से भारत रत्न तक की यात्रा

रामेश्वरम के एक साधारण मुस्लिम परिवार में जन्मे डॉ. कलाम ने गरीबी को कभी अपनी उड़ान में बाधा नहीं बनने दिया। उन्होंने विज्ञान और तकनीक के माध्यम से भारत की रक्षा और अंतरिक्ष क्षमताओं को नई ऊँचाइयों तक पहुंचाया। ISRO और DRDO में उनका योगदान न केवल मिसाइल विकास कार्यक्रमों तक सीमित रहा, बल्कि उन्होंने देश को सामरिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का रास्ता भी प्रशस्त किया।


राष्ट्रपति से जन-प्रेरणा तक

2002 में जब डॉ. कलाम भारत के राष्ट्रपति बने, तब वह केवल संवैधानिक पद तक सीमित नहीं रहे, बल्कि एक ऐसे “जनप्रिय राष्ट्रपति” बने जिन्होंने राष्ट्रपति भवन को ज्ञान का केंद्र बना दिया। वे छात्रों से संवाद करते, उनके विचारों को सुनते और उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा देते। उनका मानना था, “राष्ट्र का भविष्य कक्षा में आकार लेता है।”


डॉ. कलाम: युवाओं के मन में बसे आदर्श

डॉ. कलाम का जीवन-दर्शन युवाओं को स्वप्न देखने और उन्हें साकार करने के लिए प्रेरित करता रहा है। उनके विचार –

“सपना वो नहीं जो सोते वक्त आए, सपना वो है जो आपको सोने न दे”
आज भी युवाओं के लिए मशाल की तरह मार्गदर्शन करता है।


प्रधानमंत्री का आह्वान: कलाम के सपनों को साकार करें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से आग्रह किया कि डॉ. कलाम की विरासत को केवल स्मरण में न रखें, बल्कि उसे अपने कार्यों और सोच में आत्मसात करें। “विकसित भारत” का जो सपना कलाम जी ने देखा था, उसे साकार करना ही उनके प्रति हमारी सबसे बड़ी श्रद्धांजलि होगी।


निष्कर्ष: एक विचार जो अमर है

डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम एक युगद्रष्टा थे। उनका जीवन हमें बताता है कि कैसे सादगी, सेवा और समर्पण के बल पर कोई व्यक्ति राष्ट्र का पथप्रदर्शक बन सकता है। उनकी पुण्यतिथि केवल एक स्मरण नहीं, बल्कि आत्मावलोकन का अवसर है — क्या हम उस भारत की ओर बढ़ रहे हैं जिसकी कल्पना उन्होंने की थी?


“कलाम न केवल एक नाम हैं, बल्कि भारत की आत्मा में रचा-बसा एक विचार हैं। जब-जब भारत आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ेगा, डॉ. कलाम का स्मरण स्वतः होता रहेगा।”


Exit mobile version