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🕉️ हरिद्वार मांसा देवी मंदिर में मची भगदड़: सीएम योगी ने जताया शोक, कहा – “ईश्वर दिवंगत आत्माओं को शांति प्रदान करें”


   

हरिद्वार, 27 जुलाई 2025 — उत्तराखंड के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल मांसा देवी मंदिर में रविवार को हुए एक दर्दनाक हादसे ने पूरे देश को झकझोर दिया। श्रावण मास के अवसर पर दर्शन करने पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच अचानक भगदड़ मच गई, जिसमें कई लोगों की मृत्यु हो गई और अनेक श्रद्धालु घायल हो गए।

इस हृदय विदारक घटना पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गहरा दुःख जताया और शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट की। उन्होंने अपने आधिकारिक बयान में लिखा:

हरिद्वार के मांसा देवी मंदिर में हुई भगदड़ की दुर्घटना अत्यंत पीड़ादायक है। दिवंगत आत्माओं के लिए ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि उन्हें अपने श्रीचरणों में स्थान दें और घायलों को शीघ्र स्वस्थ करें। इस कठिन समय में पीड़ित परिवारों के साथ पूरा देश खड़ा है।

🚑 मुख्यमंत्री ने की त्वरित राहत और चिकित्सा की अपील

मुख्यमंत्री योगी ने उत्तराखंड प्रशासन से यह भी आग्रह किया कि घायलों को तत्परता से चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराई जाए और भीड़ नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाए जाएं, जिससे भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। उन्होंने अधिकारियों से अनुरोध किया कि प्रभावित परिवारों को हर संभव सहयोग दिया जाए।

📿 क्या है हादसे की पृष्ठभूमि?

रविवार को श्रावण माह की सप्तमी तिथि के दिन, मांसा देवी मंदिर में भक्तों की अत्यधिक भीड़ उमड़ पड़ी थी। सुबह के समय जैसे-जैसे भीड़ बढ़ती गई, मंदिर परिसर के भीतर व्यवस्था चरमरा गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, किसी अफवाह के चलते अचानक धक्का-मुक्की शुरू हो गई और लोग एक-दूसरे पर गिरने लगे। यही स्थिति जल्द ही भगदड़ में बदल गई।

हादसे के दौरान अधिकांश पीड़ित महिलाएं, बुज़ुर्ग और छोटे बच्चे थे, जो भीड़ के दबाव को सह नहीं सके। घटनास्थल पर पुलिस और राहत दल तुरंत पहुंचे, लेकिन तब तक कई ज़िंदगियां समाप्त हो चुकी थीं।


🕯️ निष्कर्ष

हरिद्वार की इस त्रासदी ने धार्मिक आयोजनों में सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन की गंभीरता को पुनः उजागर कर दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रतिक्रिया से यह संदेश स्पष्ट है कि जनजीवन की सुरक्षा सर्वोपरि है और प्रशासन को धार्मिक स्थलों पर विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए।

इस प्रकार की घटनाएं भविष्य में न हों, इसके लिए योजना, निगरानी और प्रबंधन प्रणाली को और अधिक मज़बूत किए जाने की आवश्यकता है।


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