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🛰️ NISAR मिशन: इसरो और नासा की साझेदारी से पृथ्वी विज्ञान में क्रांति


श्रीहरिकोटा, 27 जुलाई 2025 — भारत और अमेरिका के बीच वैज्ञानिक सहयोग का एक और चमकता सितारा जल्द ही अंतरिक्ष में अपनी जगह लेने वाला है। इसरो (ISRO) और नासा (NASA) द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया गया उपग्रह NISAR (NASA-ISRO Synthetic Aperture Radar) अब अपने प्रक्षेपण के अंतिम चरण में है। इसे 30 जुलाई को शाम 5:40 बजे आंध्र प्रदेश के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से GSLV-F16 रॉकेट के ज़रिए लॉन्च किया जाएगा।

🌍 मिशन का उद्देश्य:

NISAR का मुख्य लक्ष्य है — पृथ्वी की सतह, पर्यावरणीय बदलाव, और प्राकृतिक आपदाओं पर गहन निगरानी रखना। यह मिशन पृथ्वी के भौगोलिक और पारिस्थितिकीय परिवर्तनों को अभूतपूर्व सटीकता के साथ रिकॉर्ड करेगा, जिससे जलवायु परिवर्तन, भूस्खलन, ग्लेशियर की चाल और समुद्री जलस्तर जैसी गंभीर चुनौतियों का पूर्वानुमान और समाधान संभव हो सकेगा।

📡 तकनीकी विशेषताएँ:

🌐 वैश्विक उपयोगिता:

NISAR से प्राप्त आंकड़े निम्नलिखित क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव लाएंगे:

👨‍🔬 वैज्ञानिक और सामाजिक प्रभाव:

NISAR से प्राप्त आंकड़ों से जलवायु वैज्ञानिकों, कृषि विशेषज्ञों, पर्यावरणविदों और नीति निर्माताओं को टिकाऊ विकास और आपदा प्रबंधन में अभूतपूर्व सहायता मिलेगी। यह जल संकट, फसल की निगरानी, और बाढ़ जैसे खतरों के लिए अलर्ट सिस्टम की नींव तैयार करेगा।

🤝 भारत-अमेरिका सहयोग का प्रतीक:

NISAR केवल एक वैज्ञानिक उपकरण नहीं, बल्कि यह दर्शाता है कि कैसे दो वैश्विक शक्तियाँ मिलकर धरती की बेहतरी के लिए काम कर सकती हैं। इस मिशन में दोनों देशों के इंजीनियरों, वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों ने एकजुट होकर कार्य किया है।

इसरो ने ट्वीट किया:

“🌐 एक पृथ्वी, एक दृष्टिकोण — NISAR से जुड़े हैं हमारे विज्ञान, सहयोग और साझा भविष्य के संकल्प। #EarthFirst #ISRONASA”

🚀 भविष्य की ओर उड़ान:

GSLV-F16 रॉकेट पर सवार होकर NISAR केवल एक उपग्रह नहीं, बल्कि मानवता की वैज्ञानिक समझ और वैश्विक साझेदारी का प्रतीक बन जाएगा। इसकी उड़ान धरती के हर कोने को जोड़ने वाली जानकारी लेकर आएगी, जो भविष्य को अधिक सुरक्षित, जागरूक और टिकाऊ बना सकेगी।


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