
टर्नबेरी (स्कॉटलैंड), 28 जुलाई 2025 — अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रविवार को एक ऐतिहासिक व्यापार समझौते की घोषणा की, जो अमेरिका और यूरोपीय संघ (EU) के बीच अब तक का सबसे बड़ा और व्यापक समझौता बताया जा रहा है। इस करार के तहत दोनों पक्षों ने सभी वस्तुओं पर 15% समान आयात शुल्क लगाने पर सहमति जताई है, साथ ही ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र में विशाल निवेश का मार्ग प्रशस्त किया गया है।
यह घोषणा ट्रम्प और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के बीच हुई एक द्विपक्षीय बैठक के बाद की गई, जिसे फॉक्स न्यूज पर लाइव प्रसारित किया गया। वॉन डेर लेयेन ने 27 देशों के यूरोपीय संघ का प्रतिनिधित्व किया।
ट्रम्प ने कहा, “यह समझौता सिर्फ व्यापारिक सहयोग नहीं, बल्कि रणनीतिक साझेदारी की ओर एक बड़ा कदम है। यूरोपीय संघ अमेरिका से 750 अरब डॉलर मूल्य की ऊर्जा खरीदेगा और 600 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष निवेश भी करेगा।”
राष्ट्रपति ट्रम्प ने इसे “शून्य शुल्क, शून्य बाधाओं और पारस्परिक सम्मान” पर आधारित साझेदारी बताया। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि यूरोपीय देशों ने सैन्य उपकरणों की बड़ी खरीद पर भी सहमति जताई है, जिससे अमेरिका के रक्षा उद्योग को भारी लाभ मिलेगा।
उन्होंने कहा, “यूरोपीय देश अब हमारे सबसे उन्नत सैन्य हार्डवेयर खरीदने जा रहे हैं। हमारे पास दुनिया में सबसे बेहतरीन रक्षा तकनीक है, और अब यह साझेदारी उसे और मजबूत करेगी।”
ट्रम्प ने स्पष्ट किया कि यह समझौता 1 अगस्त 2025 से लागू हो जाएगा। इससे न केवल व्यापारिक संतुलन सुधरेगा बल्कि दोनों महाद्वीपों के बीच आर्थिक और राजनीतिक संबंध भी और मजबूत होंगे।
वहीं, वॉन डेर लेयेन ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा, “यह समझौता एक नए युग की शुरुआत है, जिसमें अमेरिका और यूरोप मिलकर वैश्विक अर्थव्यवस्था को दिशा देंगे।”
प्रभाव और संभावनाएँ:
- शुल्क में कटौती: 15% समान शुल्क से व्यापारिक लागत घटेगी, जिससे उपभोक्ताओं को सस्ते उत्पाद मिल सकेंगे।
- ऊर्जा समझौता: अमेरिका से गैस और तेल जैसे ऊर्जा उत्पादों की बड़ी आपूर्ति यूरोप को ऊर्जा संकट से राहत दे सकती है।
- निवेश में बढ़ोतरी: 600 अरब डॉलर का निवेश नई नौकरियों और तकनीकी विकास के रास्ते खोलेगा।
- रक्षा सहयोग: अमेरिकी रक्षा उद्योग को बड़ा निर्यात अवसर मिलेगा, जिससे विश्व में इसकी स्थिति और मजबूत होगी।
यह करार न केवल अमेरिका और यूरोपीय संघ के रिश्तों को एक नई मजबूती देगा, बल्कि वैश्विक व्यापार व्यवस्था में भी इसकी गूंज सुनाई देगी।