
मैनचेस्टर (यूके), 28 जुलाई 2025 — ओल्ड ट्रैफर्ड में भारत और इंग्लैंड के बीच खेला गया चौथा टेस्ट न केवल रोमांचक मोड़ पर खत्म हुआ, बल्कि मैदान पर हुई एक खास बातचीत ने भी क्रिकेट प्रेमियों का ध्यान खींचा। इंग्लैंड के कप्तान बेन स्टोक्स ने भारतीय ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा से अंतिम दिन मैच ड्रॉ घोषित करने का प्रस्ताव रखा, जिसे जडेजा ने मुस्कुराते हुए ठुकरा दिया।
⏳ पंद्रह ओवर, अडिग इरादे
पांचवें दिन का खेल जब अंतिम 15 ओवर में प्रवेश कर चुका था, इंग्लैंड की ओर से स्टोक्स, ज़ैक क्रॉली और बेन डकेट ने जडेजा से औपचारिक रूप से हाथ मिलाकर मैच खत्म करने की बात की। लेकिन जडेजा ने विनम्रता से इनकार करते हुए कहा, “हम दोनों (मैं और सुंदर) अब भी बल्लेबाज़ी का लुत्फ उठा रहे हैं। खेल जारी रखना चाहते हैं।”
यह जवाब दर्शाता है कि भारतीय खिलाड़ी सिर्फ आंकड़ों के लिए नहीं, बल्कि खेल के हर क्षण को जीने के लिए मैदान में उतरते हैं।
🎙️ स्टोक्स का रणनीतिक सोच
मैच के बाद मीडिया से बात करते हुए स्टोक्स ने स्पष्ट किया कि यह फैसला उन्होंने टीम की भलाई को ध्यान में रखते हुए लिया था। उन्होंने कहा:
“हम उस मोड़ पर थे जहां परिणाम तय था। ऐसे में तेज़ गेंदबाजों को ज़्यादा थकाना समझदारी नहीं होती, खासकर तब जब अगला टेस्ट नज़दीक है।”
स्टोक्स ने आगे कहा कि खिलाड़ी की फिटनेस और रिकवरी इस समय उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने स्वीकारा कि अगर विपक्ष खेलना चाहता है, तो वे उसका सम्मान करते हैं, लेकिन उनकी टीम के लिए जोखिम लेना जरूरी नहीं था।
🤝 खेल भावना की मिसाल
इस घटना ने यह भी दिखा दिया कि कैसे खेल के मैदान पर प्रतिस्पर्धा के साथ-साथ आपसी सम्मान और संवाद की भावना भी जीवित रहती है। जहां एक ओर स्टोक्स ने खिलाड़ी सुरक्षा और रणनीति को प्राथमिकता दी, वहीं जडेजा ने खेल के प्रति समर्पण का परिचय दिया।
निष्कर्ष:
मैनचेस्टर टेस्ट भले ही ड्रॉ रहा हो, लेकिन मैदान पर हुई यह जडेजा-स्टोक्स बातचीत क्रिकेट के ‘जेंटलमैन गेम’ स्वरूप की एक और मिसाल बन गई। यह क्षण हमें याद दिलाता है कि टेस्ट क्रिकेट सिर्फ परिणाम का खेल नहीं, बल्कि धैर्य, सोच और खेल भावना का भी प्रतीक है।