
ताइपेई, 28 जुलाई 2025 — ताइवान जलडमरूमध्य में एक बार फिर तनाव गहराता जा रहा है, क्योंकि चीन की ओर से लगातार की जा रही सैन्य गतिविधियों ने ताइवान की सुरक्षा एजेंसियों को पूरी तरह अलर्ट मोड पर ला दिया है। पिछले 24 घंटों में चीनी सेना (PLA) के कई लड़ाकू विमान और नौसैनिक पोत ताइवान के समीप देखे गए, जिससे क्षेत्रीय तनाव एक नई ऊँचाई पर पहुँच गया है।
ताइवान के रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी रिपोर्ट में बताया गया है कि चार चीनी लड़ाकू विमान और दस युद्धपोत ताइवान के निकटवर्ती जल और वायु क्षेत्र में सक्रिय पाए गए। चिंताजनक बात यह रही कि इन विमानों ने वायु रक्षा पहचान क्षेत्र (ADIZ) में अनधिकृत प्रवेश किया और मध्य रेखा (Median Line) को पार किया, जिसे दोनों पक्षों के बीच अनौपचारिक सीमा माना जाता है।
📌 हरकतें जारी, सतर्कता बढ़ी
यह कोई पहली बार नहीं है जब इस प्रकार की सैन्य गतिविधि देखी गई है। बीते रविवार को भी ऐसी ही स्थिति बनी थी जब चीन की सैन्य उपस्थिति ताइवान के द्वीपीय क्षेत्र के बहुत नजदीक तक पहुँच गई थी। इस बार ताइवान ने तुरंत अपने लड़ाकू विमान रवाना कर निगरानी तेज की और समुद्री क्षेत्र में भी गश्त बढ़ा दी।
ताइवान सरकार का कहना है कि राष्ट्रीय संप्रभुता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और सभी संभावित खतरों के खिलाफ तत्काल और प्रभावी प्रतिक्रिया दी जाएगी।
🇨🇳 चीन की आक्रामक नीति और ताइवान की रणनीति
चीन लगातार ताइवान को अपने नियंत्रण में लाने की बात करता रहा है और कई बार उसने “बल प्रयोग” की भी चेतावनी दी है। दूसरी ओर, ताइवान खुद को एक लोकतांत्रिक और स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में स्थापित करता है और अपनी स्वायत्तता की रक्षा के लिए हर संभव तैयारी कर रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह सैन्य आक्रामकता केवल ताइवान तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इससे पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में असंतुलन पैदा हो सकता है।
🌍 अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया
अमेरिका ने स्पष्ट शब्दों में चीन की कार्रवाइयों की निंदा की है और ताइवान के साथ अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। जापान, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और यूरोपीय देशों ने भी क्षेत्र में शांति बनाए रखने की अपील की है और इस तनाव को वैश्विक स्थिरता के लिए खतरा बताया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं, समुद्री व्यापार मार्गों और रणनीतिक साझेदारियों को भी प्रभावित कर सकती है।
🛡️ ताइवान की सक्रियता और आगे की चुनौती
ताइवान अब अपनी सैन्य और तकनीकी क्षमताओं को लगातार उन्नत कर रहा है। वायु सुरक्षा नेटवर्क, नौसैनिक प्रणालियाँ, और साइबर डिफेंस को मजबूत किया जा रहा है ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके। इसके साथ ही, ताइवान ने अपने नागरिकों को भी सजग रहने की सलाह दी है।
निष्कर्ष:
ताइवान जलडमरूमध्य में जो घटनाक्रम सामने आ रहा है, वह केवल द्विपक्षीय विवाद नहीं बल्कि एक व्यापक वैश्विक शक्ति संतुलन का संकेत है। यदि चीन अपनी सैन्य आक्रामकता को जारी रखता है, तो यह सिर्फ ताइवान ही नहीं, बल्कि समूचे विश्व के लिए अस्थिरता का कारण बन सकता है।