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🟢 2030 तक एआई को शुद्ध ऊर्जा से चलाने की मांग: संयुक्त राष्ट्र महासचिव की वैश्विक तकनीकी कंपनियों से अपील


संयुक्त राष्ट्र, 28 जुलाई 2025
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने दुनिया भर की तकनीकी कंपनियों से एक गंभीर और दूरगामी अपील की है। उन्होंने आग्रह किया है कि 2030 तक सभी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित डेटा केंद्रों को 100% नवीकरणीय ऊर्जा से संचालित किया जाए। यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अहम कदम होगी, बल्कि तकनीकी नवाचारों की जिम्मेदार दिशा तय करने में भी सहायक होगी।

गुटेरेस ने कहा कि “एआई की प्रौद्योगिकी में असीम क्षमताएं हैं, जिससे स्वास्थ्य, शिक्षा, जलवायु और ऊर्जा क्षेत्र में क्रांतिकारी सुधार हो सकते हैं।” लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इन संभावनाओं के साथ कार्बन उत्सर्जन और ऊर्जा खपत का बड़ा संकट भी जुड़ा हुआ है।

🔋 ऊर्जा संकट और एआई की भूमिका

आज दुनिया भर में मौजूद विशाल डेटा सेंटर, जहां एआई मॉडल प्रशिक्षण और संचालन होता है, वे अकेले ही हजारों मेगावाट बिजली की खपत करते हैं। कुछ बड़े केंद्र तो एक लाख से अधिक घरों के बराबर ऊर्जा की खपत करते हैं। यदि यही रुझान जारी रहा, तो डिजिटल तकनीकों से होने वाले उत्सर्जन में भारी वृद्धि होना तय है।

🌍 ग्रीन एआई की ओर कदम

गुटेरेस ने टेक कंपनियों से आग्रह किया कि वे:

उन्होंने यह भी कहा कि यह सिर्फ एक पर्यावरणीय मुद्दा नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी है — एक ऐसी दुनिया को पीछे छोड़ने की, जो टिकाऊ और न्यायसंगत हो।

🧠 एआई और पर्यावरणीय न्याय

इस पहल के केंद्र में एक और विचार है: पर्यावरणीय न्याय। गुटेरेस ने चेतावनी दी कि यदि एआई जैसी तकनीकों के पीछे ऊर्जा का स्रोत जीवाश्म ईंधन रहा, तो इससे सबसे ज़्यादा प्रभावित वे देश होंगे जो पहले से ही जलवायु परिवर्तन से जूझ रहे हैं।


📌 निष्कर्ष:
गुटेरेस की यह अपील तकनीकी दुनिया के लिए एक निर्णायक मोड़ है। अब यह वैश्विक कंपनियों पर निर्भर है कि वे नवाचार को पर्यावरण के हित में कैसे ढालती हैं। अगर समय रहते नवीकरणीय ऊर्जा की ओर रुख नहीं किया गया, तो डिजिटल प्रगति विकास नहीं, विनाश का कारण बन सकती है।


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