
चेन्नई, 28 जुलाई 2025 — भारत का अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) एक बार फिर इतिहास रचने को तैयार है। संगठन के अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन ने सोमवार को ऐलान किया कि आगामी 30 जुलाई को भारत और अमेरिका की साझा परियोजना — निसार (NASA-ISRO Synthetic Aperture Radar) उपग्रह को जीएसएलवी-एफ16 रॉकेट द्वारा लॉन्च किया जाएगा। यह मिशन न केवल पृथ्वी की सतह की निगरानी को एक नई दिशा देगा, बल्कि जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं के अध्ययन में भी मील का पत्थर बनेगा।
🔭 निसार: पृथ्वी अवलोकन में तकनीकी छलांग
निसार मिशन को वैज्ञानिक दृष्टि से एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है। यह उपग्रह हर 12 दिनों में पूरे पृथ्वी के सतह को उच्च-रिज़ॉल्यूशन में स्कैन करेगा, वह भी दिन-रात और हर मौसम में। यह मिशन जलवायु परिवर्तन, भूकंपीय गतिविधियों, हिमनदों की गति, वनों में बदलाव और भूमि उपयोग जैसी गतिविधियों की गहराई से निगरानी करेगा।
इस उपग्रह में नासा का एल-बैंड रडार और इसरो का एस-बैंड रडार सम्मिलित किया गया है, जो एक साथ मिलकर सतह की सूक्ष्मतम हरकतों को भी सेंटीमीटर स्तर तक पकड़ने में सक्षम हैं। निसार से प्राप्त आंकड़े भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक समुदाय के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगे, विशेषकर आपदा प्रबंधन और पर्यावरणीय अनुसंधान के क्षेत्रों में।
🚀 गगनयान मिशन: अंतरिक्ष में भारतीय मानव की पहली उड़ान
निसार के अलावा, इसरो का गगनयान मिशन भी व्यापक चर्चा में है, जिसका उद्देश्य भारत के पहले मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन को सफलतापूर्वक संचालित करना है। इस परियोजना के तहत तीन मानवरहित मिशनों की योजना बनाई गई है, जिनमें से पहला मिशन दिसंबर 2025 में प्रस्तावित है।
इस पहले मिशन में भेजा जाएगा एक विशेष महिला रोबोट — व्योममित्रा। यह नाम संस्कृत के शब्दों ‘व्योम’ (अर्थात् अंतरिक्ष) और ‘मित्रा’ (अर्थात् मित्र) से मिलकर बना है। यह अर्ध-मानव रोबोट अंतरिक्ष यान की तकनीकी प्रणालियों की जांच करेगा और मानव यात्रियों के लिए सुरक्षा उपायों को परखेगा।
यदि यह मिशन सफल रहता है, तो 2026 में दो और मानवरहित उड़ानों का आयोजन किया जाएगा। और अंततः, यदि सभी परीक्षण सफल होते हैं, तो मार्च 2027 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में गगनयान को मानव यात्रियों के साथ लॉन्च किया जाएगा, जिससे भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो जाएगा जिन्होंने मानव को अंतरिक्ष में भेजा है।
🌍 भारत की वैश्विक अंतरिक्ष भूमिका
निसार और गगनयान मिशनों के माध्यम से भारत न केवल अपनी वैज्ञानिक क्षमता को प्रदर्शित कर रहा है, बल्कि यह भी स्पष्ट कर रहा है कि वह वैश्विक अंतरिक्ष अन्वेषण में निर्णायक भूमिका निभाने को तैयार है। ISRO की यह प्रगति आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना को भी मजबूती देती है और आने वाली पीढ़ियों को अंतरिक्ष विज्ञान में योगदान देने के लिए प्रेरित करती है।
🔭 निष्कर्ष:
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान की यह दोहरी उड़ान — एक ओर पृथ्वी की निगरानी में क्रांति, और दूसरी ओर मानव को अंतरिक्ष की ओर ले जाने का साहसिक कदम — यह दर्शाती है कि भारत अब केवल एक सहभागी नहीं, बल्कि वैश्विक अंतरिक्ष युग का नेतृत्वकर्ता बनने की ओर अग्रसर है।