
नई दिल्ली, 28 जुलाई 2025 – केंद्र सरकार की वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने हेतु भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा आज दो अहम सरकारी प्रतिभूतियों (Government Securities – G-Sec) की नीलामी सफलतापूर्वक संपन्न की गई। इस नीलामी में कुल ₹36,000 करोड़ की राशि के लिए निविदाएँ आमंत्रित की गई थीं, जिन पर निवेशकों की ओर से ज़बरदस्त प्रतिक्रिया देखने को मिली।
📊 नीलामी में शामिल प्रतिभूतियाँ
इस प्रक्रिया में RBI ने जिन दो G-Secs को पेश किया, वे इस प्रकार थीं:
- 5.91% G-Sec, परिपक्वता वर्ष 2028 – अधिसूचित राशि: ₹6,000 करोड़
- 6.33% G-Sec, परिपक्वता वर्ष 2035 – अधिसूचित राशि: ₹30,000 करोड़
इन दोनों प्रतिभूतियों के प्रति निवेशकों की रुचि यह दर्शाती है कि सरकारी ऋण साधनों में अब भी स्थायित्व और भरोसे का भाव बना हुआ है।
📈 प्रतिस्पर्धी बोलियों का विश्लेषण
- 2028 वाली प्रतिभूति के लिए कुल 98 प्रतिभागियों ने लगभग ₹24,453 करोड़ की बोलियाँ प्रस्तुत कीं।
- 2035 की G-Sec के लिए 402 बोलीदाताओं से ₹74,694 करोड़ की बड़ी मात्रा में निविदाएँ प्राप्त हुईं।
RBI द्वारा अंतिम रूप से स्वीकृत राशि:
- 5.91% G-Sec (2028): ₹5,998.13 करोड़
- 6.33% G-Sec (2035): ₹29,947.86 करोड़
यह आंकड़े दर्शाते हैं कि वास्तविक मांग अधिसूचित राशि से कहीं अधिक रही।
👥 गैर-प्रतिस्पर्धी बोलियों की स्थिति
इस श्रेणी में मुख्य रूप से खुदरा निवेशक, लघु वित्त संस्थान और ट्रस्ट जैसी संस्थाएं भाग लेती हैं। इसमें उन्हें बाजार मूल्य पर प्रतिभूतियाँ आवंटित की जाती हैं।
- 2028 G-Sec के लिए: ₹1.86 करोड़
- 2035 G-Sec के लिए: ₹52.13 करोड़
यह भागीदारी सूचित करती है कि छोटे निवेशक भी सरकारी प्रतिभूतियों को एक सुरक्षित विकल्प मानते हैं।
🛡️ प्राथमिक डीलरों की भागीदारी
दोनों प्रतिभूतियाँ पूरी तरह प्राथमिक डीलरों द्वारा अंडरराइट की गई थीं:
- 2028 G-Sec: ₹6,000 करोड़
- 2035 G-Sec: ₹30,000 करोड़
इससे नीलामी प्रक्रिया को स्थिरता मिली और सरकार को पूंजी जुटाने में कोई बाधा नहीं आई।
📉 प्राप्त उपज दरें
- 5.91% G-Sec (2028): 5.7986%
- 6.33% G-Sec (2035): 6.3325%
यह दर्शाता है कि निवेशक सरकार की दीर्घकालिक ऋण चुकाने की क्षमता में विश्वास रखते हैं।
🔍 आगे की रणनीति और संभावनाएँ
सभी की निगाहें अब 5–7 अगस्त 2025 को होने वाली RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक पर टिकी हैं। यदि ब्याज दरें स्थिर रखी जाती हैं या उनमें नरमी आती है, तो निकट भविष्य में G-Sec में निवेश और भी आकर्षक हो सकता है।
✅ निष्कर्ष
भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा संचालित यह नीलामी न केवल एक वित्तीय प्रक्रिया थी, बल्कि यह देश के ऋण बाजार की गहराई, पारदर्शिता और स्थिरता का भी प्रमाण बनी। निवेशकों की बढ़ती भागीदारी इस बात का संकेत है कि सरकारी प्रतिभूतियाँ अब भी एक भरोसेमंद और सुरक्षित निवेश माध्यम बनी हुई हैं।