
नई दिल्ली, 28 जुलाई 2025 – संसद के दोनों सदनों में सोमवार को हंगामे और नारेबाज़ी के बीच बार-बार स्थगन देखने को मिला। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता (LoP) राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि वे केवल संसद के भीतर ही अपनी बात रखेंगे।
राहुल गांधी ने कहा, “अगर मैं बोलूंगा, तो वह सदन के भीतर होगा। मुझे मालूम है कि लोकसभा की कार्यवाही स्थगित है, इसलिए मैं बाहर खड़ा हूं।”
जब पत्रकारों ने उनसे बाहर ही प्रतिक्रिया देने की मांग की, तो उन्होंने संक्षेप में कहा, “मेरी बोलने की जगह भीतर है।”
यह घटनाक्रम उस समय हुआ जब संसद में विशेष रूप से बिहार में चल रही “स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR)” प्रक्रिया को लेकर विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया। विपक्षी सांसद इस विषय पर चर्चा की मांग कर रहे थे और उन्होंने इसके अलावा कई अन्य सार्वजनिक महत्व के मुद्दों पर भी बहस की मांग की।
🔹 लोकसभा और राज्यसभा का हाल:
- राज्यसभा सुबह 11 बजे कुछ समय के लिए चली, लेकिन विपक्षी नारों के चलते स्थगित कर दी गई। अब इसे दोपहर 2 बजे फिर से बुलाया जाना है।
- लोकसभा पहले 12 बजे कुछ समय के लिए चली, लेकिन भारी हंगामे के कारण इसे दोबारा दोपहर 1 बजे तक स्थगित कर दिया गया।
📢 विपक्ष का जोरदार विरोध: राज्यसभा के सभापति घनश्याम तिवारी ने विपक्ष से सदन की गरिमा बनाए रखने और सरकार से सवाल पूछने की प्रक्रिया पूरी करने की अपील की। वहीं, केंद्रीय मंत्री किन्जारापु राम मोहन नायडू ने विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा, “आपने सवाल ही नहीं पूछा, तो जवाब कैसे दूं? पहले सवाल तो करें!”
🧨 ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा का विवाद: लोकसभा में “ऑपरेशन सिंदूर” पर बहस से पहले ही विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी शुरू कर दी, जिससे कार्यवाही बाधित हो गई। इसी कारण अध्यक्ष ओम बिड़ला ने कार्यवाही को 1 बजे तक स्थगित कर दिया।
🗨️ अध्यक्ष ओम बिड़ला का बयान: “पहले आप ऑपरेशन सिंदूर पर बहस की मांग करते हैं, फिर सदन में आकर वेल में चले जाते हैं। अगर बहस में भाग लेना है, तो अपनी सीट पर आइए और पूछिए – आप वाकई ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा चाहते हैं या फिर सदन को स्थगित कराना चाहते हैं?”
निष्कर्ष: संसद का यह सत्र एक बार फिर हंगामे और राजनीतिक गतिरोध की भेंट चढ़ता दिख रहा है। राहुल गांधी की संसद के भीतर बोलने की प्रतिबद्धता जहां उनकी भूमिका को रेखांकित करती है, वहीं विपक्ष और सरकार के बीच बढ़ते टकराव से संसदीय कार्य बाधित हो रही है। देखना होगा कि दोपहर 1 बजे के बाद संसद की कार्यवाही सुचारु रूप से चल पाती है या नहीं।