
दिनांक: 29 जुलाई 2025 | स्थान: नई दिल्ली
भारत सरकार मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के अंतर्गत चल रही प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) देशभर में मछली पालन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो रही है। इस योजना के अंतर्गत सरकार ने बीते पाँच वर्षों (2020-21 से 2024-25) के दौरान विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मछली पालन से जुड़ी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया है।
इस अवधि में कर्नाटक, त्रिपुरा और जम्मू-कश्मीर सहित कई राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में फिशरीज इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने के लिए कुल 6761.80 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता प्रदान की गई है। जब राज्य सरकारों के अंशदान को भी जोड़ा जाए तो यह राशि 17,210.46 करोड़ रुपये तक पहुँच जाती है, जो इस क्षेत्र में अब तक की सबसे बड़ी निवेश योजनाओं में से एक है।
इस राशि का उपयोग मछुआरों की आय बढ़ाने, मत्स्य उत्पादन में वृद्धि, फिश प्रोसेसिंग यूनिट्स, कोल्ड स्टोरेज, फीड मिल्स, बोट जेट्टीज़, हैचरीज़ और ट्रांसपोर्ट सुविधाओं को विकसित करने जैसे कार्यों में किया गया है। इससे न केवल मत्स्य पालन क्षेत्र में रोज़गार के नए अवसर सृजित हुए हैं, बल्कि भारत को वैश्विक मत्स्य बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाने में भी मदद मिली है।
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का उद्देश्य “नीली क्रांति” के माध्यम से मत्स्य पालन को आत्मनिर्भर भारत अभियान का एक मजबूत स्तंभ बनाना है। यह योजना मछुआरों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति सुधारने के साथ-साथ समुद्री और अंतर्देशीय मत्स्य क्षेत्र को सतत और जिम्मेदार तरीके से विकसित करने पर भी जोर देती है।
इस पहल की विस्तृत जानकारी के लिए इच्छुक लोग pib.gov.in/PressReleasePa लिंक पर विज़िट कर सकते हैं।
निष्कर्ष:
मत्स्यपालन क्षेत्र में केंद्र सरकार की यह पहल देश के ग्रामीण एवं तटीय क्षेत्रों में आर्थिक विकास का माध्यम बन रही है। यह योजना भारत को न केवल मत्स्य उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाएगी, बल्कि विश्व बाजार में एक मजबूत खिलाड़ी के रूप में भी स्थापित करेगी।