
परिचय:
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बार फिर से यह दावा करने के बाद कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्षविराम कराने में मध्यस्थता की थी, भारतीय राजनीति में भूचाल आ गया है। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।
पृष्ठभूमि:
ट्रंप ने अतीत में भी कई बार यह दावा किया है कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत कराई थी, लेकिन भारत सरकार हमेशा से इन दावों को नकारती रही है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में स्पष्ट किया था कि किसी भी विश्व नेता ने भारत से ऑपरेशन सिंदूर रोकने का अनुरोध नहीं किया। बावजूद इसके, ट्रंप ने फिर से वही दावा दोहराया।
पवन खेड़ा का हमला:
पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर ट्रंप को “सांप” कहकर संबोधित किया, जो मोदी के चारों ओर लिपटा हुआ है। उन्होंने कहा, “ट्रंप मोदी के चारों ओर सांप की तरह लिपटा हुआ है और अब वह कड़वी सच्चाइयों को फुफकार रहा है।” खेड़ा ने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री के पास ट्रंप के दावों को खारिज करने का अवसर था, लेकिन उन्होंने चुप रहना चुना।
राहुल गांधी की चुनौती:
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी इस मामले में प्रधानमंत्री को आड़े हाथों लेते हुए संसद में ट्रंप के बयानों को लेकर स्पष्टीकरण की मांग की। उन्होंने कहा, “अगर उनमें इंदिरा गांधी जैसा साहस है, तो वे सदन में खड़े होकर कहें कि डोनाल्ड ट्रंप झूठ बोल रहे हैं।”
राजनीतिक संकेत और आरोप:
खेड़ा ने आरोप लगाया कि मोदी जानबूझकर विपक्ष की सलाह से दूरी बना रहे हैं और यही वजह है कि ट्रंप के दावे अब सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा बन चुके हैं। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, “मोदी जी को राहुल जी की सलाह से एलर्जी है, इसलिए सच बोलने का आसान मौका भी छोड़ दिया गया।”
व्यापारिक तनाव की पृष्ठभूमि:
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका द्वारा भारत पर 20-25 प्रतिशत टैरिफ लगाए जाने की संभावना है। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता अच्छी स्थिति में है, लेकिन साथ ही उन्होंने नए शुल्कों का संकेत भी दिया।
निष्कर्ष:
डोनाल्ड ट्रंप के पुराने दावों का दोहराव न केवल कूटनीतिक दृष्टिकोण से, बल्कि आंतरिक राजनीति के लिए भी चुनौती बन चुका है। विपक्ष इसे केंद्र की असफलता मान रहा है, जबकि सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रधानमंत्री मोदी इस मामले में अपनी चुप्पी तोड़ते हैं या नहीं।