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ऑपरेशन सिंदूर पर राहुल गांधी का विवादास्पद बयान: “पहलगाम के शहीदों का खून” टिप्पणी संसद से हटाई गई

नई दिल्ली, 30 जुलाई 2025:
लोकसभा में चल रहे ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी के कुछ बयान रिकॉर्ड से हटा दिए गए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला करते हुए उन पर पहलगाम आतंकी हमले की ज़िम्मेदारी का आरोप लगाया और कहा कि प्रधानमंत्री के हाथ “पहलगाम के शहीदों के खून से सने हैं”।

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि ऑपरेशन सिंदूर केवल 22 मिनट चला और उसका उद्देश्य आतंकियों से निपटना नहीं बल्कि प्रधानमंत्री की छवि को सुरक्षित रखना था। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री ने भारतीय वायुसेना का इस्तेमाल अपने सार्वजनिक छवि की रक्षा के लिए किया, न कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए।”

गांधी ने यह भी मांग की कि प्रधानमंत्री मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सार्वजनिक रूप से “झूठा” कहें, क्योंकि ट्रंप ने कई बार यह दावा किया है कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम को मध्यस्थता से रोका है।

अमेरिका और पाकिस्तान के साथ कूटनीति पर सवाल
राहुल गांधी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर को दोपहर के भोजन पर आमंत्रित करके राजनयिक नियमों का उल्लंघन किया। गांधी का दावा था कि असीम मुनीर ही पहलगाम आतंकी हमले के पीछे का मास्टरमाइंड हैं, और यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमारे प्रधानमंत्री इस मुलाकात के दौरान अनुपस्थित रहे।

गांधी ने व्यंग्यात्मक रूप से कहा, “जिस व्यक्ति ने पहलगाम हमले की साजिश रची, वह ट्रंप के साथ लंच कर रहा है और हमारे प्रधानमंत्री कहीं दिखाई नहीं दे रहे।”

नियम 380 के तहत टिप्पणी हटाई गई
लोकसभा में नियम 380 के तहत, स्पीकर को यह अधिकार होता है कि वह किसी भी अपमानजनक, अमर्यादित या असंसदीय भाषा को रिकॉर्ड से हटवा सकते हैं। इसी नियम का प्रयोग करते हुए राहुल गांधी के “खून से सने हाथ” जैसे बयान को संसद की कार्यवाही से हटा दिया गया।

विपक्ष का हमला जारी
विपक्ष के नेता ने 29 जुलाई को भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा था कि एनडीए सरकार के पास आतंकियों से लड़ने की “राजनीतिक इच्छाशक्ति” नहीं थी, बल्कि उसने केवल प्रधानमंत्री की छवि बचाने का प्रयास किया।

गांधी ने सरकार पर पाकिस्तान को पहले से बता देने का भी आरोप लगाया कि भारत क्या कदम उठाने जा रहा है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा को गंभीर नुकसान पहुंचा।

निष्कर्ष:
राहुल गांधी के इन बयानों ने एक बार फिर संसद में राजनीतिक माहौल को गर्मा दिया है। जहां एक ओर सरकार ने इन टिप्पणियों को असंसदीय बताते हुए हटवा दिया, वहीं विपक्ष सरकार पर लगातार राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति को लेकर सवाल उठा रहा है। ऑपरेशन सिंदूर की पारदर्शिता, प्रभावशीलता और उद्देश्य अब देशव्यापी बहस का विषय बन गए हैं।

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