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भारत का सामरिक नेतृत्व और ‘ऑपरेशन सिंदूर’: एक निर्णायक कूटनीतिक दृष्टिकोण


भारत की विदेश नीति में बीते वर्षों में एक नए युग की शुरुआत देखी जा रही है, जिसमें सक्रियता, त्वरित प्रतिक्रिया और मानवीय मूल्यों की प्राथमिकता प्रमुख भूमिका निभा रही है। इसी क्रम में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को एक प्रतीकात्मक रणनीतिक पहल के रूप में देखा जा रहा है, जिसने भारत की वैश्विक भूमिका को एक नए स्तर पर पहुँचाया है।


🔍 ऑपरेशन सिंदूर: उद्देश्य और महत्व
‘ऑपरेशन सिंदूर’ एक सुनियोजित एवं तेज़ गति से निष्पादित आपातकालीन राहत अभियान था, जिसका उद्देश्य था – संकटग्रस्त अंतरराष्ट्रीय क्षेत्रों में फंसे भारतीय नागरिकों को सुरक्षित स्वदेश वापस लाना।


🎙️ डॉ. एस. जयशंकर का भाषण: दिशा और दृष्टि
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने राज्यसभा में अपने भाषण में स्पष्ट किया कि भारत अब वैश्विक घटनाक्रमों में पीछे नहीं, बल्कि अग्रिम पंक्ति में है।


📢 जन समर्थन और डिजिटल प्रतिक्रिया


🌐 भारत की नई विदेश नीति: सक्रियता और संवेदनशीलता


📝 निष्कर्ष
‘ऑपरेशन सिंदूर’ केवल एक रेस्क्यू ऑपरेशन नहीं, बल्कि भारत की सशक्त होती विदेश नीति का मूर्त उदाहरण है। राज्यसभा में डॉ. एस. जयशंकर के भाषण ने इस बात को दृढ़ता से स्थापित किया कि भारत अब आत्मविश्वासी, सक्रिय और वैश्विक ज़िम्मेदारियों को निभाने वाला राष्ट्र है। यह बदलाव न केवल कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि देश की अंतरराष्ट्रीय छवि को भी नया आयाम देता है।


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