
दिनांक: 30 जुलाई, 2025 | स्थान: चौगुले एंड कंपनी प्रा. लि., गोवा
भारत ने आज समुद्री सुरक्षा और रक्षा आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में एक उल्लेखनीय कदम बढ़ाया है। गोवा में भारतीय तटरक्षक बल के पहले स्वदेशी एयर कुशन वाहन (ACV) के निर्माण की शुरुआत के साथ ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को नया बल मिला है। यह परियोजना न केवल तकनीकी प्रगति का प्रतीक है, बल्कि देश की समुद्री सीमाओं की सुदृढ़ रक्षा प्रणाली के निर्माण की दिशा में भी एक क्रांतिकारी पहल है।
🔍 परियोजना की नींव और उद्देश्य
भारतीय तटरक्षक बल, देश की समुद्री सीमाओं की चौकसी और आपदा प्रबंधन में एक अहम भूमिका निभाता है। बदलते समय के साथ, सुरक्षा के स्वरूप में भी तेजी से परिवर्तन हुआ है—जहां गति, लचीलापन और तकनीकी दक्षता सर्वोपरि बन चुके हैं। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए स्वदेशी एयर कुशन वाहन परियोजना का शुभारंभ किया गया।
इस वाहन की डिज़ाइन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध ग्रिफॉन होवरवर्क के तकनीकी ढांचे पर आधारित है, जिसे भारतीय जरूरतों और समुद्री परिस्थितियों के अनुसार संशोधित किया गया है।
⚙️ एसीवी की प्रमुख विशेषताएं
- बहु-प्रयोजनीय संचालन: यह वाहन उथले जल, दलदली क्षेत्र और समुद्र तटों पर भी बिना किसी रुकावट के संचालित हो सकता है।
- तेज गति व त्वरित प्रतिक्रिया: समुद्री गश्त, तस्करी रोधी अभियानों और आपात स्थितियों में तुरंत कार्रवाई संभव।
- पूर्ण स्वदेशी निर्माण: प्रत्येक कलपुर्जा भारत में निर्मित, जिससे घरेलू रक्षा उद्योग को मजबूती मिलेगी।
- स्मार्ट तकनीक से लैस: अत्याधुनिक नेविगेशन, संचार और निगरानी उपकरणों से युक्त।
🎯 प्रभाव और लाभ
- 7,500 किलोमीटर से अधिक लंबी भारतीय तटरेखा की प्रभावी सुरक्षा
- तटीय क्षेत्रों में अवैध गतिविधियों पर रोकथाम
- नौसेना और तटरक्षक बल के संसाधनों में विस्तार
- युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण व रोजगार के अवसर
- रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूती
📸 समारोह की झलकियाँ
गर्डर लेइंग समारोह के दौरान एक आत्मविश्वास से भरा दृश्य सामने आया, जब अधिकारीगण लाल कालीन पर ACV निर्माण का उद्घाटन करते नजर आए। यह क्षण न केवल एक परियोजना की शुरुआत थी, बल्कि भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते मजबूत कदम का प्रतीक भी था।
🌐 निष्कर्ष
एयर कुशन वाहन परियोजना भारत की समुद्री क्षमता को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी। यह प्रयास स्पष्ट करता है कि भारत अब रक्षा क्षेत्र में न केवल उपभोक्ता, बल्कि उत्पादक की भूमिका भी निभा रहा है। “मेक इन इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” जैसे अभियानों के तहत, यह पहल आने वाले वर्षों में भारत को समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व प्रदान कर सकती है।
🇮🇳 यह सिर्फ एक निर्माण नहीं, आत्मनिर्भरता की लहर है।