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गौरव गोगोई का बड़ा हमला: “मोदी-ट्रंप संवाद पर उठते सवाल, क्या सच्चाई से परे हैं सरकारें?”


नई दिल्ली, 30 जुलाई 2025:
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच कथित संवाद को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं। उनका दावा है कि दोनों देशों की सरकारों के बयानों में गहरा विरोधाभास है, जो कि सच्चाई को छिपाने की कोशिश का संकेत देता है।

मीडिया को संबोधित करते हुए गोगोई ने कहा, “ऐसा प्रतीत होता है कि या तो मोदी और ट्रंप के बीच कोई बातचीत हुई ही नहीं, या फिर वे जानबूझकर देश की जनता को भ्रमित कर रहे हैं। दोनों सरकारों की बातों में तालमेल की भारी कमी है, जो पारदर्शिता पर प्रश्नचिन्ह लगाती है।”

🔍 विदेश मंत्री पर भी सवाल

गौरव गोगोई ने इस मुद्दे पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या जयशंकर ने खुद ट्रंप से बात की थी या नहीं। कांग्रेस ने इस आधार पर सरकार को घेरा कि जयशंकर ने स्वयं यह पुष्टि की थी कि 22 अप्रैल से 17 जून 2025 के बीच प्रधानमंत्री मोदी और ट्रंप के बीच कोई आधिकारिक फोन वार्ता नहीं हुई थी। यह तथ्य उन बयानों के विरोध में जाता है, जो सरकार की ओर से पहले सामने आए थे।

⚔️ ऑपरेशन सिंदूर और आतंकी हमले का मुद्दा

गोगोई ने ऑपरेशन सिंदूर का मुद्दा भी उठाया और प्रधानमंत्री पर आरोप लगाया कि वे इसका सारा श्रेय खुद ले रहे हैं, जबकि इस सफल अभियान के पीछे देश की जनता, सुरक्षा बलों और तमाम संस्थाओं का योगदान रहा है। उन्होंने मोदी पर यह भी आरोप लगाया कि वे पहलगाम आतंकी हमले की जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रहे हैं।

🇺🇸 भारत-पाकिस्तान मध्यस्थता पर चुप्पी?

कांग्रेस सांसद ने इस बात को भी रेखांकित किया कि डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता को लेकर 28 से 29 बार बयान दिया, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने एक बार भी सार्वजनिक रूप से उसका खंडन नहीं किया। उन्होंने कहा कि यह चुप्पी कांग्रेस और पंडित जवाहरलाल नेहरू की छवि को धूमिल करने के भाजपा के प्रयासों का हिस्सा प्रतीत होती है।

🎙 इमरान मसूद का तीखा बयान

इस राजनीतिक विवाद में कांग्रेस सांसद इमरान मसूद भी शामिल हो गए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें “विनाशकारी” और विभाजनकारी भाषा के प्रयोग से बचना चाहिए। मसूद ने आरोप लगाया कि सत्ता में आने के बाद से मोदी अपने राजनीतिक विरोधियों के लिए अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं।


🔍 निष्कर्ष:

गौरव गोगोई के आरोपों ने सरकार के विदेशी संबंधों और आतंरिक राजनीति को लेकर एक नई बहस को जन्म दे दिया है। अब यह देखना शेष है कि सरकार इन आरोपों पर क्या सफाई देती है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा निश्चित ही संसद और मीडिया दोनों में तीखी चर्चा का विषय बन सकता है।


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