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भारतीय शेयर बाजार में हल्की तेजी, अमेरिका-भारत व्यापार वार्ता बनी चिंता का विषय


नई दिल्ली, 30 जुलाई 2025 — भारतीय शेयर बाजार ने बुधवार को हल्की बढ़त के साथ कारोबार समाप्त किया, जहाँ निवेशकों की सीमित खरीदारी और वैश्विक संकेतों के मिले-जुले प्रभाव देखने को मिले। हालांकि, भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर जारी अनिश्चितता निवेशकों की चिंता का प्रमुख कारण बनी हुई है।

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का सेंसेक्स 143.91 अंकों की तेजी के साथ 81,481.86 पर बंद हुआ, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 33.95 अंकों की बढ़त के साथ 24,853.05 पर रहा। दोनों प्रमुख सूचकांकों ने दिन की शुरुआत सकारात्मक रुख के साथ की, लेकिन सत्र के मध्य में उतार-चढ़ाव बना रहा।

अमेरिका-भारत व्यापार टैरिफ को लेकर अनिश्चितता

जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के प्रमुख रणनीतिकार वी.के. विजयकुमार का मानना है कि अमेरिका द्वारा भारत पर 20-25% आयात शुल्क लगाए जाने की आशंका निवेशकों में घबराहट पैदा कर रही है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस कथन ने बाजार में नकारात्मक भावनाओं को और हवा दी है, जिससे लघु और मध्यम अवधि के निवेशक सतर्क हो गए हैं।

फेड की नीतियों का सीमित प्रभाव

विजयकुमार के अनुसार, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति से जुड़े निर्णयों का इस समय भारतीय बाजार पर कोई बड़ा असर नहीं देखने को मिलेगा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि मौजूदा गिरावट को लंबी अवधि के निवेशक गुणवत्ता वाले शेयरों को सस्ते दामों में खरीदने का अवसर मान सकते हैं।

विशेष क्षेत्रों का प्रदर्शन

शेयर बाजार में सेक्टोरल गतिविधियों की बात करें तो, पूंजीगत वस्तुओं के शेयरों में आंशिक रूप से सकारात्मक रुझान देखा गया, जबकि रियल एस्टेट और मीडिया क्षेत्रों में ऊँचाई पर बिकवाली का दबाव दिखा। कोटक सिक्योरिटीज़ के इक्विटी रिसर्च प्रमुख श्रीकांत चौहान ने इस ट्रेंड की पुष्टि की।

समझौता समय-सीमा को लेकर सस्पेंस बरकरार

बाजार विश्लेषकों का कहना है कि भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापारिक चर्चा 1 अगस्त की समय-सीमा से पहले किसी नतीजे पर पहुँचती नहीं दिख रही है। बीते रविवार को अमेरिकी अधिकारियों ने संकेत दिए थे कि इस डेडलाइन को आगे बढ़ाने की कोई योजना नहीं है, जिससे बाजार में बिकवाली और अधिक तेज हुई।

बुनियादी ताकतें दे रही हैं सहारा

भले ही व्यापार समझौते को लेकर स्थिति अस्पष्ट हो, भारत के घरेलू आर्थिक कारक अब भी बाजार को मजबूत बनाए हुए हैं। मजबूत मानसून, नियंत्रित मुद्रास्फीति दर और रिजर्व बैंक की सक्रिय भूमिका बाजार को स्थिर बनाए रखने में सहायक हो रही हैं।

पिछले वर्षों का प्रदर्शन एक नजर में

वर्ष 2025 की शुरुआत से अब तक सेंसेक्स में लगभग 4% की बढ़ोतरी हुई है। जबकि 2024 में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ने मिलकर लगभग 9-10% की वृद्धि दर्ज की थी। 2023 में यह वृद्धि और अधिक रही, जब दोनों सूचकांकों ने 16-17% तक की छलांग लगाई थी। 2022 में इन सूचकांकों में लगभग 3% की सीमित वृद्धि हुई थी।


निष्कर्ष:
हालांकि भारतीय शेयर बाजार फिलहाल स्थिर दिखाई दे रहा है, लेकिन अमेरिका के साथ व्यापारिक गतिरोध से जुड़ी अनिश्चितता ने बाजार की दिशा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर इस बात पर टिकी रहेगी कि क्या भारत और अमेरिका के बीच कोई व्यावसायिक समाधान निकल पाता है या नहीं।


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