
नई दिल्ली, 30 जुलाई 2025 – अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर 25% आयात शुल्क और अतिरिक्त दंडात्मक कर लगाने की घोषणा ने देश की विदेश नीति को लेकर विपक्षी दलों को हमलावर बना दिया है। कांग्रेस पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाने पर लेते हुए कहा है कि भारत अब उनकी अमेरिका के साथ ‘एकतरफा दोस्ती’ की भारी कीमत चुका रहा है।
कांग्रेस ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक तीखा बयान जारी किया, जिसमें लिखा गया:
“ट्रंप ने भारत पर 25% शुल्क और जुर्माना लगाया है। मोदी ने ट्रंप के लिए प्रचार किया, उन्हें गले लगाया — और देश को मिला आर्थिक प्रहार! यही है मोदी सरकार की विफल विदेश नीति का नतीजा।”
“गले लगाने से नहीं चलती कूटनीति”
पार्टी प्रवक्ताओं का कहना है कि मोदी सरकार ने अमेरिका के साथ रिश्तों को लेकर अत्यधिक व्यक्तिगत और भावनात्मक रुख अपनाया है, जो अब रणनीतिक रूप से नुकसानदेह सिद्ध हो रहा है। कांग्रेस का आरोप है कि भारत की विदेश नीति अब संतुलन खो चुकी है और अन्य महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों को दरकिनार किया जा रहा है।
‘विवेकशील कूटनीति’ की आवश्यकता
कांग्रेस ने भारत सरकार से मांग की है कि वह तटस्थ और बहुध्रुवीय विदेश नीति को अपनाए, जिससे व्यापार और कूटनीतिक संबंध किसी एक देश पर आश्रित न हों। पार्टी ने सुझाव दिया कि भारत को चीन, यूरोपीय संघ, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिकी देशों के साथ भी रणनीतिक गठबंधन मजबूत करने चाहिए ताकि देश के व्यापारिक हितों की रक्षा की जा सके।
भारत-अमेरिका व्यापार में दरार
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्तों में पहले से ही खिंचाव चल रहा है। अमेरिका लंबे समय से भारत पर व्यापार घाटा घटाने और अमेरिकी उत्पादों को अधिक बाजार पहुंच देने का दबाव बना रहा है। ट्रंप द्वारा शुल्क बढ़ाने का कदम इसी पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है।
आगे की राह क्या?
विश्लेषकों का मानना है कि यदि भारत समय रहते इस मुद्दे को कूटनीतिक ढंग से हल नहीं करता, तो इसका असर देश की अर्थव्यवस्था और वैश्विक छवि दोनों पर पड़ सकता है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भारत सरकार इस चुनौती का जवाब कैसे देती है – क्या फिर से ट्रंप को गले लगाएगी, या फिर किसी नई दिशा में विदेश नीति का पुनर्गठन करेगी?