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SSC सेलेक्शन पोस्ट फेज XIII परीक्षा: परीक्षा प्रणाली की पोल खोलती घटनाएँ


परिचय:

भारत में प्रतियोगी परीक्षाएं युवाओं के भविष्य की दिशा तय करती हैं। कर्मचारी चयन आयोग (SSC) द्वारा आयोजित सेलेक्शन पोस्ट फेज XIII परीक्षा भी लाखों युवाओं के लिए ऐसा ही एक अवसर है। परंतु इस बार यह परीक्षा अपने उद्देश्यों से भटकती नज़र आई, क्योंकि कई केंद्रों पर अव्यवस्था, तकनीकी विफलताएं और अमानवीय व्यवहार ने छात्रों की उम्मीदों को गहरा आघात पहुँचाया।


परीक्षा में अव्यवस्था के मुख्य बिंदु:

1. तकनीकी ढांचे की असफलता:

देश के कई परीक्षा केंद्रों पर कंप्यूटर नेटवर्क ठप हो गया। कई छात्रों को परीक्षा शुरू होने के घंटों बाद तक बाहर बैठना पड़ा और कुछ को बिना परीक्षा दिए ही लौटना पड़ा। कहीं-कहीं पर परीक्षा पूरी तरह रद्द कर दी गई। ऐसे में जिन्होंने हजारों रुपये खर्च कर यात्रा की, उनके लिए यह बड़ा झटका था।

2. केंद्रों का अराजक प्रबंधन:

कई रिपोर्ट्स में सामने आया कि केंद्रों के कर्मचारी छात्रों से रूखे और अपमानजनक तरीके से पेश आए। एक घटना में एक कर्मचारी का कथित बयान – “अगर 15 मिनट में बाहर नहीं निकले तो फेंक देंगे”, सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसने प्रशासन की संवेदनहीनता उजागर की।

3. निर्धारित समय से पहले गेट बंद:

कई छात्रों ने बताया कि केवल 1-2 मिनट की देरी पर उन्हें प्रवेश नहीं दिया गया, जबकि अंदर तकनीकी गड़बड़ियों के कारण परीक्षा शुरू ही नहीं हो सकी थी। ऐसे नियमों की सख्ती तब सवालों के घेरे में आ जाती है जब संस्थाएं खुद अपनी ज़िम्मेदारी नहीं निभा पातीं।


छात्रों की त्रासदी:


व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता:

इन घटनाओं ने यह प्रमाणित कर दिया कि भारत की परीक्षा प्रणाली में कुछ बुनियादी सुधार अपरिहार्य हैं:

  1. तकनीकी ढांचे का आधुनिकीकरण
  2. कर्मचारियों को बेहतर प्रशिक्षण और संवेदनशीलता का पाठ
  3. पारदर्शी और समयबद्ध सूचना प्रणाली का निर्माण
  4. शिकायत निवारण हेतु 24×7 हेल्पलाइन और ऑन-स्पॉट समाधान व्यवस्था

निष्कर्ष:

SSC सेलेक्शन पोस्ट फेज XIII परीक्षा में जो कुछ हुआ, वह केवल एक परीक्षा की विफलता नहीं, बल्कि लाखों युवाओं की उम्मीदों और आत्मविश्वास पर प्रहार है। सरकार और परीक्षा आयोजन करने वाले संस्थानों की यह नैतिक ज़िम्मेदारी बनती है कि वे हर छात्र के साथ न्याय करें, पारदर्शिता सुनिश्चित करें और भविष्य में इस तरह की अराजकता से बचने के लिए ठोस कदम उठाएं। एक व्यवस्थित परीक्षा प्रणाली ही किसी राष्ट्र की प्रतिभा का सही मूल्यांकन कर सकती है।



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