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📰 राहुल गांधी ने ट्रंप के ‘भारतीय अर्थव्यवस्था मृत है’ बयान से जताई सहमति: कहा – ‘सच कहा है अमेरिकी राष्ट्रपति ने’


नई दिल्ली, 31 जुलाई 2025:
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान का समर्थन किया है जिसमें उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था को “मृत” (Dead) बताया। राहुल गांधी ने कहा कि वह इस बात से “खुश” हैं कि ट्रंप ने “सच बोला” और जो बात दुनिया जानती है, वही उन्होंने भी कही है।

राहुल गांधी ने मीडिया से बातचीत में कहा,

“दुनिया जानती है कि भारतीय अर्थव्यवस्था मृत अवस्था में है, सिवाय प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री के। मुझे खुशी है कि ट्रंप ने वह सच बोला जो हर कोई जानता है।”

उन्होंने बीजेपी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने अर्थव्यवस्था को “बर्बाद” कर दिया है और यह सब “अडानी को फायदा पहुंचाने” के लिए किया गया है। उनका कहना था कि बीजेपी ने जानबूझकर देश की आर्थिक रीढ़ को कमजोर किया है।

राहुल गांधी ने इसके साथ ही पीएम मोदी से कई सवाल भी किए –

उन्होंने पूछा,

“सच क्या है? नियंत्रण किसके हाथ में है? प्रधानमंत्री जवाब क्यों नहीं दे रहे?”

इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में बुधवार को ट्रंप का वो बयान था, जिसमें उन्होंने सोशल मीडिया मंच “Truth Social” पर भारत पर 25% टैरिफ लगाने और रूस से तेल आयात पर अतिरिक्त जुर्माने की घोषणा की थी। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा:

“मुझे फर्क नहीं पड़ता कि भारत रूस के साथ क्या करता है। वो दोनों मिलकर अपनी मृत अर्थव्यवस्थाओं को नीचे ले जाएँ, हमें कोई परवाह नहीं। भारत के टैरिफ विश्व में सबसे ऊँचे हैं।”

इस बयान ने भारतीय राजनीति में उथल-पुथल मचा दी। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इसके बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर पर भी निशाना साधा और भारत की विदेश नीति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा:

“एक तरफ अमेरिका भारत को नीचा दिखा रहा है, दूसरी ओर चीन भारत की सीमा पर खड़ा है। जब भारत का प्रतिनिधिमंडल दुनिया में जाता है तो कोई पाकिस्तान की निंदा नहीं करता। आखिर यह कैसी कूटनीति है?”

राहुल गांधी के इस बयान से यह स्पष्ट है कि विपक्ष आने वाले समय में सरकार की आर्थिक और विदेश नीति को चुनावी मुद्दा बना सकता है।


निष्कर्ष:
राहुल गांधी द्वारा अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान का समर्थन करना न केवल एक राजनीतिक संदेश है, बल्कि यह सरकार की नीतियों पर एक कठोर आलोचना भी है। जहां एक ओर विपक्ष इसे सरकार की विफलता मान रहा है, वहीं सत्तापक्ष की प्रतिक्रिया आने वाली है जो इस विवाद को और गहरा बना सकती है।


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