
जबकि विश्व के कुछ हिस्से तकनीकी नवाचार और आर्थिक समृद्धि की नई ऊँचाइयों को छू रहे हैं, वहीं एक मौन संकट अब भी करोड़ों लोगों की ज़िंदगी को निगल रहा है। विश्व बैंक की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, आज भी लगभग 70 करोड़ लोग अत्यधिक गरीबी में जीवन व्यतीत कर रहे हैं — ये लोग प्रतिदिन केवल $2.15 या उससे कम पर गुज़ारा करते हैं। यह आंकड़ा वैश्विक जनसंख्या का लगभग 8.5% दर्शाता है, जो इस गंभीर मानवीय संकट की भयावहता को उजागर करता है।
🌐 क्या है $2.15 की परिभाषा?
$2.15 प्रतिदिन की सीमा Purchasing Power Parity (PPP) के आधार पर निर्धारित की गई है, जिसका अर्थ है कि यह आंकड़ा विभिन्न देशों में मूल्य स्तरों को ध्यान में रखते हुए निर्धारण करता है कि न्यूनतम जीवन-निर्वाह के लिए कितनी राशि पर्याप्त होगी। यह वैश्विक स्तर पर गरीबी को मापने का एक मानक तरीका है।
🌍 कहाँ-कहाँ है गरीबी की सबसे अधिक मार?
गरीबी का सबसे गहरा असर उप-सहारा अफ्रीका और दक्षिण एशिया के कुछ हिस्सों में देखा गया है। इन क्षेत्रों में संघर्ष, बेरोजगारी, जलवायु संकट, अशिक्षा और सामाजिक असमानता गरीबी को और भी अधिक जटिल बना रहे हैं।
🔍 केवल आर्थिक विकास काफी नहीं
केवल GDP की वृद्धि या पूंजी निवेश से इस समस्या का समाधान संभव नहीं है। गरीबी उन्मूलन के लिए आवश्यक हैं:
- शिक्षा तक सार्वभौमिक पहुंच
- स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार
- कौशल विकास और डिजिटल सशक्तिकरण
- समान रोजगार अवसर
- सामाजिक सुरक्षा योजनाएँ और महिला सशक्तिकरण
- जलवायु अनुकूल बुनियादी ढाँचा
🏛️ एक वैश्विक मिशन की आवश्यकता
विश्व बैंक द्वारा प्रस्तुत ये आंकड़े केवल सूचनाएं नहीं, बल्कि एक चेतावनी और आह्वान हैं — कि हम एक ऐसा वैश्विक भविष्य बनाएं जहाँ कोई भी व्यक्ति जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं से वंचित न हो। यह मिशन केवल सरकारों का नहीं बल्कि समाज, संगठनों और प्रत्येक नागरिक की साझी जिम्मेदारी है।
✨ निष्कर्ष
जब तक धरती पर कोई भी व्यक्ति भूखा, अशिक्षित या असहाय है, तब तक हमारा विकास अधूरा है। अत्यधिक गरीबी का उन्मूलन केवल आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि मानवता की परीक्षा है। यही समय है कि हम एक साथ खड़े होकर यह सुनिश्चित करें — “कोई पीछे न छूटे।”