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🧾 कॉपर पर 50% टैरिफ से अमेरिका को हो सकता है बड़ा नुकसान: GTRI की नई रिपोर्ट



प्रकाशन तिथि: 31 जुलाई 2025
स्थान: नई दिल्ली

अमेरिका द्वारा अर्ध-निर्मित तांबे और उससे संबंधित उत्पादों पर 50% टैरिफ लगाने की योजना उसके घरेलू उद्योगों के लिए ही उल्टा असर डाल सकती है। यह दावा ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) ने अपनी ताज़ा रिपोर्ट में किया है।

🧮 क्या है मामला?

पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 1 अगस्त 2025 से यह टैरिफ लागू करने की घोषणा की गई है। टैरिफ व्यापार विस्तार अधिनियम की धारा 232 के तहत लगाया जा रहा है, जिसका तर्क “राष्ट्रीय सुरक्षा” दिया गया है। प्रशासन का कहना है कि इससे विदेशी तांबे पर निर्भरता कम होगी और अमेरिका की रक्षा, अधोसंरचना तथा हरित ऊर्जा से जुड़ी परियोजनाओं को मज़बूती मिलेगी।

⚠️ GTRI की चेतावनी: उल्टा असर पड़ेगा

GTRI की रिपोर्ट कहती है कि इस कदम से अमेरिकी कंपनियों को नुकसान होगा जो तांबे का आयात कर उत्पाद बनाती हैं। अमेरिका अपनी तांबे की ज़रूरतों का लगभग 35% आयात करता है, और यह आयात मुख्यतः भारत, मेक्सिको, जापान और जर्मनी जैसे देशों से होता है। टैरिफ के कारण इन देशों से आयात महंगा हो जाएगा, जिससे अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स की लागत बढ़ेगी।

🔧 कौन होंगे सबसे ज्यादा प्रभावित?

  1. इलेक्ट्रॉनिक्स और ग्रीन एनर्जी उद्योग: सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहन और स्मार्ट ग्रिड जैसी परियोजनाएं तांबे पर निर्भर हैं। इनकी उत्पादन लागत बढ़ सकती है।
  2. घरेलू निर्माण उद्योग: बिल्डिंग वायरिंग, प्लंबिंग और HVAC सिस्टम में तांबा एक अनिवार्य सामग्री है। टैरिफ के कारण इनकी कीमतों में इज़ाफा हो सकता है।
  3. रक्षा क्षेत्र: अमेरिका का रक्षा क्षेत्र भी बड़ी मात्रा में उच्च गुणवत्ता वाले तांबे का उपयोग करता है। इसकी आपूर्ति महंगी होने से परियोजनाएं धीमी पड़ सकती हैं।

🌍 वैश्विक असर और भारत की स्थिति

भारत से अमेरिका को तांबे का निर्यात अब महंगा पड़ेगा, जिससे भारतीय निर्यातकों को झटका लग सकता है। हालांकि, इससे चीन और चिली जैसे बड़े उत्पादक देशों को भी नुकसान होगा। भारत सरकार यदि सही रणनीति अपनाए, तो अमेरिका में अन्य उत्पादों के निर्यात को बढ़ाकर इस घाटे की भरपाई कर सकती है।

📊 निष्कर्ष: संरक्षणवादी नीति या आत्मघाती कदम?

टैरिफ लगाने की मंशा भले ही आत्मनिर्भरता बढ़ाने की हो, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह नीति अमेरिका की ही उत्पादन क्षमताओं पर प्रतिकूल असर डाल सकती है। GTRI का सुझाव है कि अमेरिका को आपूर्ति श्रृंखलाओं को विविधीकृत करने पर ध्यान देना चाहिए, न कि टैरिफ जैसे उपायों से घरेलू उद्योगों को अस्थायी सुरक्षा देना।


🔍 निष्पक्ष विश्लेषण:
टैरिफ नीति का इस्तेमाल अक्सर घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए किया जाता है, लेकिन जब यह नीति आवश्यक कच्चे माल पर लागू होती है, तो उसका उल्टा असर भी सामने आता है। कॉपर जैसी बहुउपयोगी धातु पर 50% शुल्क अमेरिका की कई औद्योगिक योजनाओं को ही महंगा बना सकता है — जो अंततः उपभोक्ता पर बोझ डालता है।


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