
प्रकाशन तिथि: 31 जुलाई 2025 | स्थान: नई दिल्ली
भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) के बीच रक्षा सहयोग अब एक नए युग में प्रवेश कर चुका है। हाल ही में हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) और “विजन 2035” साझेदारी के तहत, दोनों देशों ने एक ऐतिहासिक 10-वर्षीय रक्षा औद्योगिक रोडमैप की शुरुआत की है। यूके के भारत स्थित उच्चायोग में रक्षा सलाहकार क्रिस सॉन्डर्स ने इस योजना की विस्तृत जानकारी दी, जिसमें सुरक्षा, तकनीकी सहयोग और वैश्विक स्थिरता को प्रमुख उद्देश्य बताया गया है।
🔍 विजन 2035: भविष्य की साझा योजना
क्रिस सॉन्डर्स ने “X” (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा, “भारत और यूके ने विजन 2035 के तहत एक क्रांतिकारी रक्षा औद्योगिक रोडमैप शुरू किया है। यह समझौता न केवल दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को बढ़ावा देगा, बल्कि हमारी सुरक्षा क्षमताओं को भी मजबूत करेगा और वैश्विक स्तर पर एक सुरक्षित वातावरण तैयार करेगा।”
🔧 तकनीकी नवाचार और रक्षा अनुसंधान में सहयोग
सॉन्डर्स ने बताया कि दोनों देश मिलकर अब उन्नत तकनीकों और जटिल हथियार प्रणालियों में गहन सहयोग करेंगे। इस सहयोग में Electric Propulsion Capability Partnership (EPCP) और Jet Engine Advanced Core Technologies (JEACT) जैसे कार्यक्रम शामिल हैं। इन पहलों का उद्देश्य साझा अनुसंधान, नवाचार और सह-विकास को बढ़ावा देना है।
🌊 समुद्री सुरक्षा में भी बढ़ेगा सहयोग
समुद्री सुरक्षा को लेकर भी UK और भारत ने बड़े कदम उठाए हैं। इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव (Indo-Pacific Oceans’ Initiative) के तहत, दोनों देश “रीजनल मरीन सिक्योरिटी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस” की स्थापना करेंगे। यह केंद्र भारतीय महासागर क्षेत्र में गैर-पारंपरिक समुद्री खतरों से निपटने के लिए प्रशिक्षण, निगरानी और क्षमता निर्माण में योगदान देगा।
🤝 आर्थिक लाभ और रणनीतिक गहराई
यह साझेदारी न केवल सामरिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि आर्थिक मोर्चे पर भी यह एक बड़ा कदम साबित होगी। दोनों देशों की उद्योगगत क्षमताओं के समन्वय से रक्षा आपूर्ति श्रृंखला को मजबूती मिलेगी, रोजगार के नए अवसर उत्पन्न होंगे और वैश्विक नवाचार को प्रोत्साहन मिलेगा।
🔚 निष्कर्ष:
भारत-यूके रक्षा सहयोग अब केवल रणनीतिक साझेदारी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह एक दीर्घकालिक, नवाचार-संचालित और वैश्विक सुरक्षा-उन्मुख प्रयास बन चुका है। “विजन 2035” इसके भविष्य की नींव रखता है, जो आने वाले वर्षों में वैश्विक शक्ति संतुलन को नई दिशा देगा।