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📰 दिल्ली में हॉर्न बजाने पर बर्बर हमले: दो मामलों ने खड़े किए कानून-व्यवस्था पर सवाल




प्रकाशन तिथि: 31 जुलाई 2025
स्थान: नई दिल्ली

दिल्ली में एक बार फिर सड़क पर मामूली विवाद जानलेवा हिंसा में तब्दील हो गया। दो अलग-अलग घटनाओं में सिर्फ हॉर्न बजाने के कारण लोगों को भीड़ द्वारा बेरहमी से पीटा गया, जिससे दिल्ली की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं।

📍 पहली घटना: द्वारका सेक्टर-10 की भयावह रात

27 जुलाई की रात करीब 2:30 बजे, द्वारका सेक्टर 10 में एक ‘नाइट किचन’ के बाहर दो युवकों, मनोज और कुनाल, पर जानलेवा हमला किया गया। घटना की शुरुआत तब हुई जब मनोज ने वेटर को बुलाने के लिए गाड़ी का हॉर्न बजाया। यह छोटी सी हरकत एक बड़ी हिंसा का कारण बन गई।

पुलिस के मुताबिक, बीएमडब्ल्यू और थार गाड़ी में सवार 7-8 युवकों ने पहले दोनों पर गालियों की बौछार की, फिर उन पर बीयर की बोतलों और पत्थरों से हमला कर दिया। उन्होंने कार की खिड़कियां तोड़ीं और मनोज-कुनाल को बेरहमी से पीटा। दोनों को बाद में गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया। हमलावर मौके से फरार हो गए और पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज की मदद से आरोपियों की पहचान में जुटी है।

📍 दूसरी घटना: मुनिरका में दिनदहाड़े हुई मारपीट

दूसरी घटना 25 जुलाई को दोपहर के समय मुनिरका इलाके में हुई, जहां अवधेश राय नामक व्यक्ति को सिर्फ इसलिए पीटा गया क्योंकि उसने दोपहिया वाहन को रास्ता देने में थोड़ी देर कर दी। पीछे से हॉर्न बजा रहे बाइक सवार युवक ने पहले गालियां दीं और फिर अपने साथियों के साथ अवधेश को लाठियों से पीट-पीटकर अधमरा कर दिया। पुलिस के अनुसार, बाइक सवार के साथ एक महिला भी थी, और इस घटना में शामिल अन्य लोग भी अब तक फरार हैं।

🔍 जांच और सवाल

दिल्ली पुलिस ने दोनों मामलों में एफआईआर दर्ज कर ली है और जांच जारी है। द्वारका मामले में आरोपी हमले के बाद मौके से भाग निकले, जबकि मुनिरका घटना में पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है ताकि आरोपियों को जल्द पकड़ा जा सके।

📣 कानून व्यवस्था पर चिंता

इन दोनों घटनाओं ने यह दर्शा दिया है कि राष्ट्रीय राजधानी में गुस्से और असहिष्णुता की आग कितनी खतरनाक होती जा रही है। सड़क पर मामूली ट्रैफिक व्यवहार—जैसे हॉर्न बजाना या रास्ता न देना—भी अब हिंसक प्रतिक्रियाओं को जन्म दे रहे हैं। क्या दिल्ली अब ऐसी जगह बनती जा रही है जहां छोटी-छोटी बातों पर जान का खतरा हो?

🚨 निष्कर्ष

सड़क पर शिष्टाचार और सहनशीलता की भारी कमी के कारण हिंसक घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। जरूरत है कि कानून सख्ती से लागू हो, आरोपी जल्द से जल्द गिरफ्तार हों और समाज में जागरूकता फैलाई जाए कि असहमति और नाराज़गी का समाधान हिंसा नहीं हो सकती।



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