
प्रस्तावना
यूक्रेन में प्रशासनिक पारदर्शिता और सुशासन को सुनिश्चित करने के लिए एक बड़ा परिवर्तन देखा गया है। राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की द्वारा हाल ही में भ्रष्टाचार-रोधी कानून पर हस्ताक्षर करना, यूक्रेन के लिए केवल एक कानूनी पहल नहीं, बल्कि लोकतंत्र की जड़ों को मज़बूत करने की दिशा में एक गंभीर प्रयास है। इस कदम का यूरोपीय संघ ने भी खुले रूप से समर्थन किया है।
🔍 कानून का उद्देश्य और प्रभाव
नए कानून का मुख्य उद्देश्य है भ्रष्टाचार से लड़ने वाली प्रमुख संस्थाओं — NABU (नेशनल एंटी-करप्शन ब्यूरो ऑफ यूक्रेन) और SAPO (स्पेशल एंटी-करप्शन प्रॉसिक्यूटर ऑफिस) — को पूर्ण स्वतंत्रता और प्रशासनिक ताकत प्रदान करना। इससे इन एजेंसियों को बिना किसी राजनीतिक दबाव के काम करने में मदद मिलेगी।
- NABU उच्चस्तरीय भ्रष्टाचार की जांच करता है।
- SAPO इन जांचों के कानूनी पक्ष को संभालता है और अभियोजन की प्रक्रिया में नेतृत्व करता है।
इस कानून के तहत इन संस्थाओं की स्वायत्तता, बजटीय स्वतंत्रता और जवाबदेही की व्यवस्था को औपचारिक रूप से सुदृढ़ किया गया है।
🇪🇺 यूरोपीय संघ की प्रतिक्रिया: समर्थन और विश्वास
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इस पहल को “यूक्रेन के यूरोपीय एकीकरण की दिशा में एक ठोस कदम” बताया है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि यदि यूक्रेन भ्रष्टाचार पर काबू पाने में सफल होता है, तो वह यूरोपीय सदस्यता के लिए एक मजबूत उम्मीदवार बन सकता है। यूरोपीय संघ पहले से ही यूक्रेन को आर्थिक, तकनीकी और राजनीतिक सहायता प्रदान कर रहा है।
📢 आम जनता और विशेषज्ञों की प्रतिक्रियाएँ
यूक्रेनी नागरिकों की प्रतिक्रिया इस मुद्दे पर दो हिस्सों में बंटी हुई है।
- एक वर्ग इसे एक ऐतिहासिक सुधार मानता है जो देश को एक साफ-सुथरा शासन देने में मदद करेगा।
- वहीं कुछ आलोचक इसे बाहरी दबाव और यूरोपीय संघ की सदस्यता पाने की जल्दबाज़ी का परिणाम मानते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि इस कानून को सही ढंग से लागू किया गया, तो यह आने वाले वर्षों में यूक्रेन की पूरी राजनीतिक व्यवस्था को बदल सकता है।
📈 भविष्य की चुनौतियाँ और आवश्यकताएँ
- संस्थागत क्षमता निर्माण: NABU और SAPO को प्रशिक्षित अधिकारियों, स्वतंत्र बजट और तकनीकी सहायता की आवश्यकता होगी।
- राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्ति: एजेंसियों को बाहरी प्रभाव से मुक्त रखने के लिए सख्त निगरानी व्यवस्था बनानी होगी।
- जनविश्वास की पुनःस्थापना: नागरिकों के मन में शासन के प्रति विश्वास बहाल करना सबसे बड़ा लक्ष्य होना चाहिए।
- अंतरराष्ट्रीय सहयोग: पारदर्शिता और रिपोर्टिंग के अंतरराष्ट्रीय मानकों को अपनाना जरूरी है।