
नई दिल्ली, 1 अगस्त 2025 – भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा हाल ही में प्रकाशित किए गए आँकड़ों से यह स्पष्ट हुआ है कि देश की आर्थिक गतिविधियों में ऋण वृद्धि की रफ्तार में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव आए हैं। 27 जून 2025 को समाप्त हुए पखवाड़े के आँकड़ों के अनुसार, गैर-खाद्य ऋण में सालाना वृद्धि दर 10.2% रही, जो कि पिछले वर्ष की समान अवधि में दर्ज 13.8% वृद्धि के मुकाबले एक उल्लेखनीय गिरावट दर्शाती है।
इन आँकड़ों को देश के 41 अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों से संकलित किया गया है, जो भारत के कुल गैर-खाद्य ऋण का लगभग 95% प्रतिनिधित्व करते हैं। यह रिपोर्ट विभिन्न आर्थिक क्षेत्रों में ऋण वितरण की व्यापक और गहराई से समझ प्रस्तुत करती है।
🔍 प्रमुख क्षेत्रों में ऋण वृद्धि की स्थिति:
🚜 कृषि एवं संबंधित गतिविधियाँ:
कृषि क्षेत्र में ऋण वृद्धि में उल्लेखनीय गिरावट देखी गई है। जून 2025 में यह दर 6.8% रही, जो कि जून 2024 के 17.4% से काफी कम है। यह गिरावट ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय पहुँच और फसल उत्पादन में आई सुस्ती से जुड़ी हो सकती है।
🏭 औद्योगिक क्षेत्र:
उद्योगों को दिए गए ऋण की वृद्धि दर घटकर 5.5% पर आ गई है, जबकि पिछली बार यह 7.7% थी। हालांकि, MSMEs (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों) को ऋण देने में स्थिरता बनी हुई है। विशेषकर इंजीनियरिंग, निर्माण, और वस्त्र उद्योग में ऋण प्रवाह में कुछ तेजी देखी गई है।
🏢 सेवा क्षेत्र:
सेवाओं से जुड़े कारोबारों को दिए गए ऋण में भी गिरावट दर्ज की गई है। इस वर्ष यह वृद्धि 9.6% रही, जबकि पिछले वर्ष 15.1% थी। गिरावट का मुख्य कारण गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) को मिलने वाले ऋण में सुस्ती है। फिर भी, आईटी सेवाओं और पेशेवर सेवाओं जैसे उप-क्षेत्रों में गतिविधियाँ सकारात्मक बनी हुई हैं।
👨👩💼 व्यक्तिगत ऋण:
व्यक्तिगत ऋण में भी थोड़ी मंदी देखने को मिली है। 14.7% की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है, जो कि 2024 में 16.6% थी। यह कमी मुख्यतः वाहन ऋण, क्रेडिट कार्ड बकाया और अन्य व्यक्तिगत ऋणों में धीमे विस्तार के कारण है।
🌐 सेवाओं का वैश्विक व्यापार: एक उज्ज्वल पहलू
आरबीआई की एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, जून 2025 में भारत के सेवा व्यापार क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
- सेवाओं का निर्यात (प्राप्तियाँ): 12% की वार्षिक वृद्धि के साथ यह आँकड़ा 32.11 बिलियन डॉलर तक पहुँच गया है।
- सेवाओं का आयात (भुगतान): 5% की वृद्धि के साथ आयात 15.90 बिलियन डॉलर रहा।
यह आँकड़े भारत के सेवा क्षेत्र की वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूत स्थिति को दर्शाते हैं। विशेषकर आईटी, व्यवसाय परामर्श और वित्तीय सेवाओं जैसे क्षेत्रों ने वैश्विक बाजार में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है।
🧾 निष्कर्ष:
आरबीआई की रिपोर्ट से यह स्पष्ट है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में ऋण वृद्धि की रफ्तार कुल मिलाकर धीमी हुई है, लेकिन सभी क्षेत्रों की स्थिति एक जैसी नहीं है। एमएसएमई, आईटी सेवाएँ, और अंतर्राष्ट्रीय सेवा व्यापार जैसे क्षेत्रों में अब भी मजबूती बनी हुई है।
इन आँकड़ों से यह भी संकेत मिलता है कि यद्यपि अर्थव्यवस्था में सुधार की दिशा बनी हुई है, फिर भी कृषि, उद्योग और व्यक्तिगत ऋण जैसे क्षेत्रों को अतिरिक्त प्रोत्साहन और नीतिगत हस्तक्षेप की आवश्यकता है।
आगे की राह के लिए, नीति निर्माताओं को उन क्षेत्रों पर अधिक ध्यान देना होगा जहाँ ऋण प्रवाह में ठहराव आया है, ताकि विकास की समग्र गति को बनाए रखा जा सके।