
नई दिल्ली:
दिल्ली स्थित राउज़ एवेन्यू अदालत ने मनी लॉन्ड्रिंग के एक गंभीर मामले में कांग्रेस नेता रॉबर्ट वाड्रा और अन्य आरोपियों को नोटिस जारी किया है। यह मामला हरियाणा के गुरुग्राम जिले के शिकोहपुर गांव में हुई एक विवादास्पद भूमि डील से संबंधित है। अदालत ने इस पर अगली सुनवाई की तारीख 28 अगस्त तय की है।
यह नोटिस आरोपियों को उस स्तर पर सुनवाई का अवसर देने के लिए जारी किया गया है जब कोर्ट द्वारा अब तक आरोपों को औपचारिक रूप से संज्ञान में नहीं लिया गया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से दायर अभियोजन शिकायत और प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर विशेष न्यायाधीश सुशांत चांगोत्रा ने यह नोटिस जारी किया।
ईडी द्वारा दाखिल चार्जशीट के अनुसार, इस मामले में स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड ने तीन एकड़ जमीन की खरीद की थी, जिसमें कथित तौर पर आर्थिक अनियमितताएं और फर्जी दस्तावेज शामिल हैं। ईडी का दावा है कि 7.5 करोड़ रुपये के भुगतान का झूठा उल्लेख किया गया, जबकि वास्तविक भुगतान नहीं हुआ। इसे स्टाम्प ड्यूटी बचाने के लिए जानबूझकर दिखाया गया कदम बताया गया है।
प्रवर्तन निदेशालय का आरोप क्या है?
ईडी ने अदालत को सूचित किया कि यह एक “साफ-सुथरा और क्लासिक मनी लॉन्ड्रिंग” केस है, जहाँ अपराध से प्राप्त धन का उपयोग अचल संपत्तियों की खरीद में किया गया। ईडी के मुताबिक, इस धन को सबसे पहले स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी के खातों में स्थानांतरित किया गया और बाद में उसका प्रयोग जमीन लेने में हुआ।
ईडी के वकीलों – विशेष लोक अभियोजक नवीन कुमार मट्टा, मोहम्मद फैज़ान और जोहेब हुसैन – ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कोर्ट में यह मामला रखा। उन्होंने बताया कि स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी में रॉबर्ट वाड्रा की 99% हिस्सेदारी है, और इस कंपनी के जरिए धन शोधन की प्रक्रिया शुरू की गई।
गवाहों के बयान और साक्ष्य:
अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि उनके पास धन के प्रवाह, फर्जी दस्तावेजों और प्रमुख गवाहों के बयान उपलब्ध हैं, जो इस घोटाले की पुष्टि करते हैं। मुख्य गवाहों ने स्वीकार किया है कि ज़मीन की खरीद-बिक्री में पैसे का कोई वास्तविक लेन-देन नहीं हुआ था।
अदालत की टिप्पणी और अगला कदम:
कोर्ट ने ईडी के बिंदुओं को गंभीरता से लिया है और कहा है कि सभी आरोपियों को चार्जशीट की प्रतियां उपलब्ध कराई जाएँ। इसके साथ ही सभी पक्षों को निर्देश दिया गया है कि वे आगामी 28 अगस्त को अदालत के समक्ष पेश होकर आरोपों पर अपना पक्ष रखें।
🔍 निष्कर्ष:
यह मामला केवल एक ज़मीन सौदे तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें आर्थिक अपराध, धनशोधन और सत्ता से जुड़ी ताकतों के दुरुपयोग जैसे कई गंभीर मुद्दे उठाए गए हैं। आने वाली सुनवाई में यह स्पष्ट होगा कि कोर्ट इन दावों और साक्ष्यों को किस दृष्टिकोण से देखती है और क्या रॉबर्ट वाड्रा एवं अन्य आरोपी अदालत के समक्ष अपनी सफाई में कुछ ठोस प्रस्तुत कर पाएंगे।