वाशिंगटन डीसी, 2 अगस्त:
फिलिपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर की अमेरिका यात्रा ने भू-राजनीतिक समीकरणों में हलचल मचा दी है। इस यात्रा के दौरान जहां उन्होंने चीन की ‘एकतरफा वैश्विक व्यवस्था’ की तीखी आलोचना की, वहीं पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख अपनाने से बचते हुए आर्थिक संबंधों को तरजीह दी।
🇨🇳 चीन पर सीधा वार
राष्ट्रपति मार्कोस ने अपने बयान में कहा, “चीन यदि अंतरराष्ट्रीय कानूनों और समुद्री संप्रभुता का उल्लंघन करता है, तो यह केवल एशिया ही नहीं, पूरी दुनिया की स्थिरता के लिए खतरा है।” उन्होंने दक्षिण चीन सागर में चीन के सैन्यीकरण, कृत्रिम द्वीप निर्माण और आक्रामक रवैये को ‘वैश्विक व्यवस्था को अपने अनुसार ढालने की कोशिश’ करार दिया।
🇺🇸 ट्रंप का अलग नजरिया
वहीं डोनाल्ड ट्रंप ने चीन को लेकर अपेक्षाकृत सौम्य रुख अपनाया। उन्होंने कहा, “हम व्यापार और आर्थिक साझेदारी को सबसे पहले देखते हैं। फिलिपींस को चाहिए कि वह अपने पड़ोसियों से संतुलित संबंध बनाए रखे।” उन्होंने दक्षिण चीन सागर या अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के उल्लंघन का कोई उल्लेख नहीं किया।
🤝 व्यापार बनाम सुरक्षा
जहां मार्कोस चीन के विस्तारवादी रवैये पर मुखर रहे, वहीं ट्रंप ने चीन के साथ व्यापारिक संबंधों को प्राथमिकता दी, खासकर दुर्लभ खनिजों के क्षेत्र में। ट्रंप का कहना था कि अमेरिका को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बनाए रखने के लिए चीन के साथ सामंजस्य रखना चाहिए।
🔁 बाइडन बनाम ट्रंप की रणनीति
राष्ट्रपति बाइडन की नीति फिलिपींस, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ त्रिपक्षीय और चतुष्कोणीय साझेदारियों को बढ़ावा देने पर केंद्रित रही है। इसके उलट, ट्रंप की प्राथमिकता चीन से व्यापारिक लाभ लेने की रही है। यह अंतर दर्शाता है कि अमेरिकी नेतृत्व में चीन को लेकर एकरूप नीति का अभाव है।
📌 निष्कर्ष
राष्ट्रपति मार्कोस की यात्रा इस बात का संकेत है कि फिलिपींस अब चीन की बढ़ती दादागिरी को चुनौती देने में पीछे नहीं हटेगा। दूसरी ओर, ट्रंप की व्यापार केंद्रित नीति से यह संदेह पैदा होता है कि यदि वे सत्ता में लौटते हैं तो क्या अमेरिका अपने पुराने रणनीतिक सहयोगियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी उठाएगा?
